Bengabad (Giridih) : बेंगाबाद प्रखंड के ओझाडीह गांव स्थित मां बूढ़ेश्वरी मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है. इस मंदिर को जाग्रत माना जाता है. मान्यता है कि यहां मन्नतें मांगने से पूरी होती है. मन्नत पूरा होने पर श्रद्धालु बकरे का बलि चढ़ाते हैं. मां की विशेष पूजा मुख्य रूप से फाल्गुन मास के त्रयोदशी तिथि के अलावा सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को होती है. इन तिथियों के नहीं पड़ने पर फाल्गुन पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा की जाती है. पूजा का इतिहास पुराना है. हजारों वर्ष पूर्व से चली आ रही इस परंपरा को आज भी कायम रखा गया है. वार्षिक पूजा में हजारों की संख्या में भक्तों का जुटान होता है. राज्य के कोडरमा, धनबाद, बोकारो और देवघर समेत बिहार व बंगाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. हजारों वर्ष पूर्व यहां माता की पूजा स्थानीय निवासी खोशाल सिंह ने शुरू की थी. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार खोशाल सिंह अचानक अपने गांव से गायब हो गए. वे लंबे समय तक देवघर जिला के बुढ़ई स्थित मां बूढ़ेश्वरी की पूजा करते रहे. देवघर से लौटने के बाद उन्होंने गांव में माता बूढ़ेश्वरी की स्थापना की. शुरू में माता की पिंड स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई. मंदिर के पुजारी फाल्गुनी सिंह ने बताया कि 16 पीढ़ियों से माता की पूजा होती आ रही है. माता को स्थापित करने वाले खोशाल सिंह के अलावा उनके भाई रतन सिंह समेत अन्य भाई भी पूजा करते थे. उन सभी भाइयों के गुजरने के बाद पीढ़ी दर पीढ़ी पूजा की परंपरा चली आ रही है. पूजा के दिन हजारों की संख्या में बकरे की बलि दी जाती है. समय बीतने के साथ यहां माता के भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. विशेष पूजा के दिन ज्यादा भीड़ जुटने के कारण गांव में ही दो स्थानों पर माता की पूजा की जाती है. दोनों ही स्थानों पर बलि देने का प्रचलन है. पूजा का संचालन करने के लिए पूजा समिति गठित है.
संतान प्राप्ति की मन्नत होती है पूरी
माता बूढ़ेश्वरी मंदिर में विशेषकर निसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं. निसंतान दंपत्ति को मंदिर का प्रसाद खिलाया जाता है, जिसे ग्रहण करने से संतान की प्राप्ति होती है. मंदिर के पुजारी के अनुसार अबतक कई निसंतान दंपत्ति को संतान की प्राप्ति हुई है. यही कारण है कि दूर दराज के दंपत्ति संतान की चाह में मंदिर आते हैं.
लगता है मेला
फाल्गुन माह में माता बूढ़ेश्वरी की विशेष पूजा के समय ओझाडीह गांव में भव्य मेला लगता है. हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं तथा पूजा कर मेला का आनंद उठाते हैं. मेला क्षेत्र में सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था रहती है. मेला समिति के अध्यक्ष सुनील सिंह, जयप्रकाश सिंह, रंजीत कुमार सिंह, अरबिंद सिंह, मंजीत सिंह, कपिलदेव सिंह, सुमन कुमार सिंह, योगेंद्र सिंह समेत अन्य लोग पूरी व्यवस्था में जुटे रहते हैं.
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