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बंगाल चुनाव नतीजे : 49 सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा थी 'अंडर-एडजुडिकेशन' वोटर्स की संख्या

Lagatar Desk :   चार मई को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जबरदस्त जीत मिली. उसने 294 में से 207 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 80 सीटें मिलीं. राज्य में बहुमत की सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 148 सीटों की ही जरूरत होती है. अब तक 293 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जबकि फलता सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग होनी है.

 

इन नतीजों की चर्चा के पीछे एक अहम बात छिपी है, जिसका सीधा संबंध वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों से है. चुनाव से पहले चुनाव आयोग (EC) ने कई महीनों तक 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान चलाया. इसके तहत 90 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनमें से 27 लाख लोगों को 'अंडर-एडजुडिकेशन' (UA) श्रेणी में डाल दिया गया. 

 

चुनाव आयोग के एक 'गुपचुप एल्गोरिदम' ने इन लोगों के डेटा में कुछ 'तार्किक विसंगतियां' पकड़ी थीं. इसलिए ऐसा करना पड़ा या किया गया. इन वोटर्स ने कोर्ट द्वारा नियुक्त ट्रिब्यूनल में अपील दायर करके अपने नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल करने की मांग की. 99% से ज्यादा अपीलें अभी लंबित थीं. फिर भी चुनाव हो गए और कई जगह जीत-हार का अंतर हटाए गए वोटर से ज्यादा है.

 


यह मामला 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया. उस दिन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उन वोटर्स की याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनकी अपीलें अभी भी लंबित हैं. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों और चुनावी नतीजों के बीच के संबंध को लेकर एक बेहद अहम चिंता जाहिर की.

 

न्यायमूर्ति बागची ने इस बात की ओर इशारा किया कि बंगाल में चुनाव आयोग (ECI) ने SIR प्रक्रिया के उन नियमों का पालन नहीं किया, जिनका पालन दूसरे राज्यों में किया गया था. इसके बजाय, चुनाव आयोग ने बंगाल में 'तार्किक विसंगति' (Logical Discrepancy) नाम की एक नई श्रेणी शुरू कर दी.

 

इस पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि "अगर 10% वोटर वोट ही न डाल पाएं और जीतने वाले उम्मीदवार की जीत का अंतर (Margin) 10% से ज्यादा हो, तो क्या होगा? मान लीजिए जीत का अंतर सिर्फ 2% है, लेकिन 15% वोटर (जिनके नाम वोटर लिस्ट में थे) वोट ही नहीं डाल पाए, तो ऐसे में... हम अभी कोई राय तो नहीं दे रहे हैं, लेकिन हमें इस मामले पर गंभीरता से विचार जरूर करना होगा. इस बात को ध्यान में रखें कि एक जागरूक वोटर की चिंता, जिसका नाम, चाहे सही कारणों से या गलत कारणों से, वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है, हमारे जहन में बनी हुई है."

 

 
घोषित 293 सीटों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह चिंता 49 निर्वाचन क्षेत्रों में सच साबित हुई, जहां जांच के दायरे में आने वाले मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी. कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में यह अंतर बहुत ज्यादा था. उदाहरण के लिए राजारहाट न्यू टाउन में BJP 316 वोटों से जीती, जबकि उस निर्वाचन क्षेत्र में 24,132 मतदाता जांच के दायरे में थे. समशेरगंज में TMC 7,587 वोटों के अंतर से जीती, लेकिन 74,775 मतदाता अभी भी अपने नाम शामिल होने के फैसले का इंतजार कर रहे थे. इन 49 सीटों में से BJP ने 26, TMC ने 21 और INC ने 2 सीटें जीतीं.

 

डिस्क्लेमर :  इस खबर को अल्ट न्यूज की पोस्ट का हिंदी अनुवाद को संपादित कर तैयार किया गया है.

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