Bermo : ताजिकिस्तान में फंसे झारखंड के 18 मजदूरों की वतन वापसी हुई है. दिल्ली पहुंचने पर मजदूरों ने ईश्वर का नाम लेते हुए मिट्टी को चुमा और सरकार का आभार जताया. दिल्ली से कुछ मजदूर बस से और कुछ ट्रेन से अपने-अपने घर पहुंचे. मजदूरों ने वतन वापसी होने पर केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सिकन्दर अली और मीडिया का आभार प्रकट किया. बता दे कि बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग और धनबाद जिले के 36 मजदूर ताजिकिस्तान में फंस गए थे. उन्हें ठीक ढंग से खाना भी नहीं दिया जा रहा था. इसी बीच मजदूरों ने पिछले 13 फरवरी को प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली को सोशल मीडिया के ज़रिए वीडियो शेयर कर अपनी पीड़ा बताई. इसके बाद केंद्र व राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया. सरकार की मदद से मजदूरों को बकाया मजदूरी का भी भुगतान कराया गया. इसके बाद 18 मजदूरों की वतन वापसी करायी गयी.
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इन मजदूरों की हुई वतन वापसी
लौटने वाले मजदूरों में बोकारो जिले के गोमियां प्रखंड अंतर्गत हुरलुंग के नारायण महतो, बालेश्वर महतो, अशोक कुमार, कतवारी के प्रकाश महतो, गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत तुकतुको के खिरोधर महतो, नागेश्वर चौधरी, रामदेव महतो, औरा के सुखदेव महतो, संतोष कुमार, महुरी के गोवर्धन महतो, ढिबरा के जगरनाथ महतो, सरिया प्रखंड के अंतर्गत पिपराडीह के डुमरचंद महतो, डुमरी प्रखंड अंतर्गत कुलगो के शंकर कुमार महतो, हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर के बालेश्वर महतो, नागी के महेन्द्र महतो, सारूकुदर के टुकामन महतो, नागेश्वर महतो. खरना के डेगलाल महतो, महेश महतो, शामिल हैं. वहीं दो मजदूर प्रकाश महतो और दिनेश महतो की वापसी पूर्व में हो चुकी हैं. अभी भी 16 मजदूरो की ताजिकिस्तान से वापसी होना बाकी हैं. यह">https://lagatar.in/phusro-coal-production-will-have-to-be-40-thousand-tonnes-per-day-to-achieve-the-target-mk-rao/">यहभी पढ़ें : फुसरो : लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिदिन 40 हज़ार टन करना होगा कोयला उत्पादन: एमके राव [wpse_comments_template]
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