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बेरमो: पंचायत चुनाव में एससी,एसटी आरक्षित सीटों को लेकर संशय,भोक्ता सहित अन्य जातियों को नहीं मिल रहा लाभ

Bermo : भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद भोक्ता, खरवार सहित अन्य कुछ जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त हो गया है. इसके बावजूद भी उन्हें पंचायत चुनाव में कहीं अनुसूचित जाति तो कहीं अनुसूचित जनजाति के सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ रहा है. चतरा जिले में भोक्ता, खरवार जाति को जहां अनुसूचित जनजाति के सीट पर चुनाव के लिए मान्यता प्राप्त है, वहीं बोकारो जिले में यह मान्यता नहीं मिली है. जिसके कारण भोक्ता सहित अन्य शामिल जातियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
इस संबंध में पूछे जाने पर बोकारो डीसी कुलदीप चौधरी ने बताया कि जो वस्तु स्थिति है  उस संबंध में सभी निर्वाची पदाधिकारियों को पत्र भेज दिया गया है.

क्या है बोकारो डीसी का पत्र

जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) -सह- उपायुक्त, बोकारो ने 24 अप्रैल को भारत सरकार के द्वारा झारखंड की कुछ जातियों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में अधिसूचित करने के संबंध में जिले के सभी निर्वाची पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजा है. पत्र  में भारत सरकार के राजपत्र संख्या-08 में 08 अप्रैल, 2022  को अधिसूचना निर्गत तिथि से ही प्रभावी होने की बात कही है. उक्त राजपत्र के आलोक में खरवार, भोगता, देशवारी, गंझु, दौतलबन्दी (द्वालबंदी), पदबंदी, राउत, मझीया, खैरी (खेरी), तमाड़िया एवं पुरान जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल कर दिया गया है. इसे भी पढ़ें-ममता">https://lagatar.in/mamta-wants-infiltration-to-continue-in-bengal-we-will-implement-caa-to-stop-it-shah/">ममता

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कानून का नहीं हो रहा है पालन : कालेश्वर बौद्ध

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव कालेश्वर बौद्ध ने कहा कि बोकारो जिले में भोक्ता, खरवार सहित अन्य कुछ जाति को एसटी का दर्जा प्राप्त हो गया है लेकिन जिले में इस कानून का पालन नहीं हो रहा है जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने बोकारो डीसी से लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव तक इसकी शिकायत की है. उन्होंने मांग की है कि एसटी में शामिल जातियों को पंचायत चुनाव में आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने का अवसर प्रदान किया जाए.   [wpse_comments_template]  

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