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बेरमो : 30 घंटे बाद गेट-सड़क जाम हटा, आश्रित को नौकरी व मुआवजा पर बनी सहमति

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ओरिका कंपनी की आवासीय कॉलोनी में तैनात निजी गार्ड की मौत के बाद से आंदोलित थे लोग

Bermo : गोमिया स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी ओरिका की आवासीय कॉलोनी में तैनात निजी गार्ड नारायण यादव की संदिग्ध स्थिति में मौत के बाद मु़आवजा व आश्रित को नौकरी की मांग को लेकर परिजन व ग्रामीण 23 जुलाई की सुबह से शव के साथ कंपनी का गेट व सामने की सड़क जाम कर दिया था. 30 घंटे बाद प्रबंधन के साथ वार्ता में मृतक के पुत्र को गार्ड की नौकरी व मुआवजा देने पर सहमति बनने के बाद 24 जुलाई की दोपहर लोगों ने जाम हटा दिया. ओरिका कंपनी के मानव संसाधन विभाग की ओर से मृतक के आश्रित को सहमति पत्र मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.

क्या है सहमति पत्र में

आईईएल थाना परिसर में बेरमो एसडीओ, एसडीपीओ की मौजूदगी में कंपनी के अधिकारी के साथ जन प्रतिनिधियों की समझौता वार्ता हुई. वार्ता में मृतक नारायण यादव के पुत्र संदीप कुमार को निजी एजेंसी मेसर्स नेशनल इंजिनीरिंग कंपनी में तीन महीने तक नाइट गार्ड की नौकरी देने और इसके बाद उसे सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त करने पर सहमति बनी. इसके साथ ही प्रवधान के तहत निजी कंपनी आश्रित को बतौर मुआवजा 6 लाख 12 हज़ार 898 रुपए और मृतक के अंतिम संस्कार के लिए एक माह का वेतन 8688 रुपए देगी. आईईपीएल कंपनी भी 78 हज़ार 414 रुपए की सहयोग राशि देगी. ज्ञात हो कि ओरिका कंपनी की आवासीय कॉलोनी में निजी सुरक्षा गार्ड नारायण यादव की 23 जुलाई की अहले सुबह ड्यूटी के दौरान संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई थी. वह गोमिया के चौधरी टोला का रहने वाला था. वार्ता में सहमति बनने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टर्माटम के लिए तेनुघाट अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया.

विधायक समेत पंचायत प्रतिनिधियों का लगा रहा जमावड़ा

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के सैकड़ों लोगों ने रविवार को कंपनी का गेट जाम कर दिया था. गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो, पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद, जिप अध्यक्ष सुनीता देवी, जिप सदस्य डॉ सुरेंद्र राज, कांग्रेस के पंकज पांडे, गोमिया मुखिया बलराम रजक, शांति देवी, जनक देव यादव सहित कई गणमान्य लोगों ने मौके पर पहुंचकर प्रबंधन पर आश्रित को नौकरी व मुआवजा देने के लिए दबाव बनाया. झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयराम महतो भी रविवार की रात धरना स्थल पर पहुंचे और कंपनी से आश्रित को नौकरी व मुआवजा देने की मांग की. आंदोलन के दौरान जम स्थल पर गोमिया व आसपास के थानों की पुलिस तैनात थी.
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