Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

बेरमो: नर्स के भरोसे गोमिया का सरकारी अस्पताल, मरीज परेशान

Advertisement
Advertisement
Bermo: आमलोगों की उम्मीद सरकारी अस्पताल होते हैं. इसके लिए सारी सुविधाएं दी जाती हैं. लेकिन गोमिया अस्पताल की तस्वीर कुछ और ही है. इस अस्पताल में न दिन में और न रात को चिकित्सक मिलते हैं. मरीज बीमार हो या कोई इमरजेंसी हो तो वहां इलाज कराना जान जोखिम में डालने के बराबर हो सकता है. कई ऐसे मामले हैं, जहां मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसमें एक मामला शनिवार रात का है. जानकारी के अनुसार गोमिया के साड़म निवासी सह अधिवक्ता रोहित ठाकुर को अचानक पेट में दर्द हुआ. वह रात के साढ़े दस बजे गोमिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे. इलाज के लिए इमरजेंसी में गये. वहां एक नर्स थी. जिन्होंने उनसे पांच रुपये लिये और रजिस्टर में नाम दर्ज कर लिया. लेकिन जब इलाज की बात आयी तो चिकित्सक नहीं थे. आखिर में उन्होंने दर्द की दवा ली और घर चले गए. दूसरा मामला गोमिया के महली बांध का है. इसमें शिव शंकर सिंह एक कार के चपेट में आने से घायल हो गये थे. इसमें उनका पैर टूट गया था. वह रविवार शाम गोमिया अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में चिकित्सक नहीं थे. नर्स ने मरहम पट्टी की. चिकित्सक नहीं रहने के कारण उन्हें रेफर कर दिया गया. तीसरा मामला गोमिया का है. बताया जाता है कि रविवार को गोमिया तेनुघाट मेन रोड निवासी राजेंद्र रविदास की पत्नी ज्योति कुमारी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में नर्स के द्वारा प्रसव कराया गया. शाम के करीब पांच बजे एक बच्ची का जन्म हुआ. चार घंटे तक बच्ची नहीं रोई. तब उसे बोकारो सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद से बात की तो उन्होंने तुरंत गोमिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ जितेंद कुमार को पूछा और अस्पताल भेजा. इसे भी पढ़ें- राहुल">https://lagatar.in/rahul-gandhis-attack-said-becoming-a-apologist-on-a-black-law-pm-modi-will-have-to-withdraw-agneepath-scheme/">राहुल

गांधी का हल्ला बोल, कहा, काले कानून की तरह माफीवीर बनकर पीएम मोदी को वापस लेना पड़ेगी अग्निपथ योजना
इस संबंध अधिवक्ता रोहित ठाकुर ने कहा कि सरकार लाखों रुपये चिकित्सकों के वेतन में खर्च करती है, ताकि राज्य की जनता को स्वास्थ्य सेवा मिल सके. लेकिन सरकारी अस्पताल के चिकित्सक मनमानी करते हैं. अपनी ड्यूटी समय पर नहीं करते हैं. इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अमीर व्यक्ति अपना इलाज निजी अस्पताल में करा लेंगे. लेकिन गरीब व्यक्ति कहां जाएंगे. वे सरकारी अस्पताल के ही भरोसे हैं. सरकार को इस पर गंभीर होना चाहिए. इसे भी पढ़ें- पीएम">https://lagatar.in/pm-modis-mothers-100th-birthday-pm-gave-a-shawl-pakhare-feet-as-a-gift/">पीएम

मोदी की मां का 100वां जन्मदिन : PM ने गिफ्ट में दी शॉल, पखारे पैर
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही