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बेरमो: पंचायत चुनाव में एलईडी स्ट्रीट लाइट चर्चा का मुद्दा

Bermo :  बोकारो जिला के गोमिया प्रखण्ड अन्तर्गत विभिन्न पंचायतों में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने में भारी अनियमितता बरती गयी है. नतीजतन लाइट लगने के कुछ ही दिन बाद एलइडी बल्ब खराब होने शुरू हो गये थे और मौजूदा समय में एक दो को छोड़कर सभी लाइटें बूझ गयी है. अब पंचायत चुनाव हो रहा है तो मतदाता मुखिया द्वारा किए गए कार्य की समीक्षा कर रहे हैं. वे उनसे सवाल भी पूछ रहे हैं. जब एलईडी स्ट्रीट लाइट लगायी जा रही थी उस समय मुखिया लाइट लगाने के नाम पर बड़े बड़े दावे किये थे, मगर सभी दावे बेकार साबित हुए. आज सड़कों एवं गांव की गलियों में लगी उक्त लाइट शोभा की वस्तु बनकर रह गयी हैं. एलइडी स्ट्रीट लाइट लगाने में पंचायत सचिव और मुखिया के द्वारा बड़े पैमाने पर कमीशन लेकर घटिया लाइट लगाने का आरोप लगाया है. इसे भी पढ़ें-बिहारः">https://lagatar.in/bihar-a-bridge-worth-1711-crores-collapsed-in-the-storm-gadkari-took-a-jibe-nitish-government-in-action/">बिहारः

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 निर्देश का पालन नहीं किया

दरअसल 19 मार्च को ग्रामीण विकास विभाग के पंचायती राज निदेशालय ने राज्य के सभी जिला पंचायती राज पदाधिकारी को एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार के अन्तर्गत कार्यरत संयुक्त क्षेत्रीय इइएसल से मनोनयन के आधार पर पंचायतों में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का आदेश दिया था. लेकिन पंचायती राज पदाधिकारी, पंचायत सेवक एवं मुखिया ने उक्त निर्देश  का पालन नहीं किया. लिहाजा नियमों के विपरीत घटिया किस्म की एलइडी स्ट्रीट लाइट लगायी गयी, जिसके कारण लाइट लगने के साथ ही एलइडी बल्ब खराब होना शुरू हो गया था. अब तो नजारा ऐसा है कि एक दो को छोड दें तो सभी लाइटों की रोशनी बूझ गयी है. इसे भी पढ़ें-हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-hundreds-of-students-upset-due-to-non-payment-of-scholarship/">हजारीबाग

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क्या था उद्देश्य

संविधान की 11वीं अनुसूची के आलोक में नागरिकों को मौलिक सुविधाएं उपलब्ध कराना पंचायतों का संवैधानिक दायित्व है. इस क्रम में पंचायत क्षेत्र की सडकों पर सुरिक्षत आवागमन एवं अपराध नियंत्रण के लिए पथ पर प्रकाश की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण कार्य है. इसी उद्देश्य के आलोक में पंचायत के सभी सड़क मार्गो में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का निर्णय लिया गया. पंचायत राज निदेशालय ने प्रत्येक पंचायत को एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए तीन लाख अठासी हजार तीन सौ दस रूपये उपलब्ध कराये गये, ताकि पंचायत की सड़कें अंधेरे में नहीं रहे, लेकिन पंचायतों के मुखिया ने एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने में अनियमितता की, जिसका परिणाम है कि अमूमन सभी लाइटें खराब हो गयी. जबकि निदेशालय का आदेश था कि इइएसएल के माध्यम से ही लाइट लगाने का कार्य किया जाय, लेकिन पंचायत प्रतिनिधि इइएसएल के नियमों को ताक पर रखकर एलईडी स्ट्रीट लाइट अपने मनपंसद के एजेंसी से लगायी. [wpse_comments_template]

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