Bermo:जिला में आसमान उगलता आग और धधकती धरती के कारण लोगों का जीना दूभर है. इसके बाबजूद इस तपती धूप में ग्रामीण महिलाएं एक किलोमीटर की दूरी तय कर पीने का पानी लाने को मजबूर हैं. यह हकीकत बेरमो अनुमंडल के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत गोनियाटो पंचायत के ढाई हजार की आबादी वाला चिटैहिया गांव की है. गांव के कुछ दूरी पर बड़की नदी में बरसात के दिनों में पानी का बहाव अच्छा रहता है, लेकिन गर्मी आते ही वह सूख जाती है. तब गांव के लोग बालू में चुआं खोदकर पानी निकाल घर लाते हैं ताकि खाना बनाने व पीने में उपयोग कर सकें. नदी जाने के क्रम में जंगल पड़ता है जंगली जानवरों के भय से महिलाए समूह में जाती है.इससे दूरी का भी एहसास नहीं होता है और अन्य खतरों से भी निपटने का साहस बना रहता है.इस क्षेत्र में नल जल योजना की रफ्तार इतनी कम है कि पूर्ण होने में दो-ढाई साल लग सकते हैं. विवश है महिलाएं: मुखिया मुखिया अमृता कुमारी ने कहा कि जब तक पानी टंकी का निर्माण नहीं हो जाता तब तक यह संकट बरकरार रहेगा. वे अपने स्तर से गांव के चापानलों का मरम्मत कराती रहती हैं, लेकिन पर्याप्त पानी के आभाव में बड़की नदी से पानी लाने को महिलाएं विवश हैं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=613364&action=edit">यह
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बेरमो: तपती धूप में चुआं खोदकर पानी लाने को विवश हैं महिलाएं

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