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‘शुभम संदेश’ की पड़ताल में बड़ा खुलासा : 56 हजार में बिक रहे इंटर के सर्टिफिकेट

न परीक्षा देने की जरूरत, न क्‍लास करने का झंझट, पैसा दो दो साल बाद सर्टिफ‍िकेट लो  Pramod Upadhyay Hazaribagh : ‘शुभम संदेश’ की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है. शिक्षा का हब माने जानेवाले हजारीबाग में अब डिग्रियां बेची और खरीदी जा रही है. शहर के कोर्रा चौक में हजारीबाग इंटर कॉलेज के नाम पर बड़ा गोरखधंधा चल रहा है. ‘शुभम संदेश’ के पत्रकार ने जब अभिभावक बनकर अपने बच्चे के नामांकन और पास से संबंधित जानकारी ली, तो वहां मौजूद संचालक सूर्य देव प्रजापति ने बताया कि फिक्र मत कीजिए, सबकुछ हो जाएगा. 28 हजार रुपए में 11वीं पास के सर्टिफिकेट मिल जाएंगे. 12वीं पास के लिए भी इतनी ही राशि अलग से देनी होगी. झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) और सीबीएसई बोर्ड से उत्तीर्ण सर्टिफिकेट के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है. संचालक ने यह भी बताया कि इसके लिए क्लास करें या न करें, परीक्षा दें या न दें, सालभर में 28 हजार रुपए लगेंगे. इस तरह 11वीं और 12वीं पास के लिए 56 हजार रुपए खर्च आएंगे और सर्टिफिकेट मिल जाएंगे. उनकी पैठ जैक और सीबीएसई बोर्ड दोनों में है. दरअसल कोर्रा में हजारीबाग इंटर कॉलेज के नाम पर शिक्षा माफिया बन कोचिंग और कॉलेज के साथ कंसल्टेंसी भी चलाई जा रही है. इस कंसल्टेंसी में सिर्फ सर्टिफिकेट के लेन-देन होते हैं.

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, उठ रहे कई सवाल

इंटर पास के ऐसे सर्टिफिकेट मिलने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. एक तो बच्चों को बिना पढ़े और बगैर परीक्षा दिए सर्टिफिकेट मिल रहे हैं, तो उनका ज्ञान किस स्तर का होगा, यह समझा जा सकता है. उनकी पढ़ाई की नींव को ही कमजोर कर दिया जा रहा, तो प्रतियोगिता के इस दौर में आगे उनका भविष्य कितना कारगर और सुरक्षित होगा, यह अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए गहन आत्मचिंतन और मंथन का विषय है. दूसरी ओर यह सर्टिफिकेट कितना सही और गलत है, यह भी जांच का विषय है.

न कॉलेज का रजिस्ट्रेशन, न ढंग का क्लास रूम

सबसे दिलचस्प बात यह है कि कोर्रा में संचालित हजारीबाग इंटर कॉलेज का न तो रजिस्ट्रेशन है और न ढंग का क्लास रूम है. एक ही क्लास रूम में तीन शिफ्ट में बच्चों की कक्षाएं चलती है. साइंस और आर्ट्स संकाय की यहां पढ़ाई होती है. यहां बच्चों की इंटर की भी पढ़ाई होती है और कोचिंग का भी संचालन किया जाता है. फिलहाल करीब 300 बच्चे यहां नामांकित हैं.

कई कॉलेजों से कराया गया है रजिस्ट्रेशन : संचालक

हजारीबाग इंटर कॉलेज के संचालक सह चतरा निवासी सूर्य देव प्रजापति कहते हैं कि कई सरकारी और प्राइवेट इंटर कॉलेजों से उनका संपर्क है. उनके कॉलेज का रजिस्ट्रेशन नहीं है. बच्चे अगर पढ़ना चाहते हैं, तो कोचिंग के जरिए पढ़ाकर उनका दूसरे कॉलेजों से रजिस्ट्रेशन कराते हैं. अगर बच्चा कमजोर है या नहीं पढ़ना चाहता है, तो अभिभावक की मर्जी के अनुसार जैक या सीबीएसई बोर्ड से संपर्क कर उन्हें पास कराकर सर्टिफिकेट उपलब्ध करा देंगे. [caption id="attachment_550032" align="alignnone" width="925"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/inter-college_627.jpg"

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