बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, उठ रहे कई सवाल
इंटर पास के ऐसे सर्टिफिकेट मिलने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. एक तो बच्चों को बिना पढ़े और बगैर परीक्षा दिए सर्टिफिकेट मिल रहे हैं, तो उनका ज्ञान किस स्तर का होगा, यह समझा जा सकता है. उनकी पढ़ाई की नींव को ही कमजोर कर दिया जा रहा, तो प्रतियोगिता के इस दौर में आगे उनका भविष्य कितना कारगर और सुरक्षित होगा, यह अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए गहन आत्मचिंतन और मंथन का विषय है. दूसरी ओर यह सर्टिफिकेट कितना सही और गलत है, यह भी जांच का विषय है.न कॉलेज का रजिस्ट्रेशन, न ढंग का क्लास रूम
सबसे दिलचस्प बात यह है कि कोर्रा में संचालित हजारीबाग इंटर कॉलेज का न तो रजिस्ट्रेशन है और न ढंग का क्लास रूम है. एक ही क्लास रूम में तीन शिफ्ट में बच्चों की कक्षाएं चलती है. साइंस और आर्ट्स संकाय की यहां पढ़ाई होती है. यहां बच्चों की इंटर की भी पढ़ाई होती है और कोचिंग का भी संचालन किया जाता है. फिलहाल करीब 300 बच्चे यहां नामांकित हैं.कई कॉलेजों से कराया गया है रजिस्ट्रेशन : संचालक
हजारीबाग इंटर कॉलेज के संचालक सह चतरा निवासी सूर्य देव प्रजापति कहते हैं कि कई सरकारी और प्राइवेट इंटर कॉलेजों से उनका संपर्क है. उनके कॉलेज का रजिस्ट्रेशन नहीं है. बच्चे अगर पढ़ना चाहते हैं, तो कोचिंग के जरिए पढ़ाकर उनका दूसरे कॉलेजों से रजिस्ट्रेशन कराते हैं. अगर बच्चा कमजोर है या नहीं पढ़ना चाहता है, तो अभिभावक की मर्जी के अनुसार जैक या सीबीएसई बोर्ड से संपर्क कर उन्हें पास कराकर सर्टिफिकेट उपलब्ध करा देंगे. [caption id="attachment_550032" align="alignnone" width="925"]alt="हजारीबाग इंटर कॉलेज " width="925" height="586" /> हजारीबाग इंटर कॉलेज[/caption] इसे भी पढ़ें : राज्यपाल">https://lagatar.in/governor-returned-jharkhand-finance-bill-2022-for-the-third-time/">राज्यपाल
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