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बिहार : भाजपा व आरएलजेडी ने शिक्षक भर्ती नियमावली में बदलाव का किया विरोध

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Patna : विपक्षी दलों ने बिहार में शिक्षक भर्ती नियमावली में बदलाव का विरोध किया है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 4-5 साल से वादा कर रहे थे कि मेरिट लिस्ट बनाकर शिक्षकों की बहाली करेंगे. सीटीईटी और एसटीईटी पास अभ्यर्थियों ने चार साल तक इंतजार किया. पांचवें साल अब सरकार फरमान सुना दिया कि बीपीएसससी से शिक्षकों की बहाली होगी. अभ्यर्थियों के जो ये चार साल बर्बाद हुए, उसकी भरपाई क्या नीतीश कुमार करेंगे? उन्होंने नीतीश सरकार से शिक्षक बहाली में बिहारियों को कम से कम 70 फीसदी आरक्षण देने की मांग की है. अब कैबिनेट निर्णय के बाद बिहार सरकार नोटिफिकेशन लेकर आई है कि राज्य में शिक्षक बनने के लिए यहां का निवासी होने की कोई बाध्यता नहीं है. अब पूरे देश के सीटीईटी पास अभ्यर्थी बिहार में शिक्षक का काम कर सकेंगे.

नीतीश खुद राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाना चाहते हैं

निखिल आनंद ने कहा कि इस नियम से हमें कोई ऐतराज नहीं है. मगर नीतीश कुमार को कम से कम बिहार के क्षेत्रीय पहलू का भी सम्मान करना चाहिए. इस भर्ती अभियान में कम से कम बिहार के 70 फीसदी छात्रों को मौका देना चाहिए. इस तरीके से ओपन करके सीएम नीतीश खुद राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाना चाहते हैं और बिहार के युवाओं का जीवन दांव पर लगाना चाहते हैं. यह घोर निंदनीय है. बिहार के छात्रों का जीवन नीतीश कुमार की नई शिक्षा नीति के चलते बर्बाद होता जा रहा है.

11 दिनों में नियमावली में 8 संशोधन- उपेंद्र कुशवाहा

आरएलजेडी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी ट्वीट कर नीतीश सरकार पर हमला बोला है. कुशवाहा ने अपने ट्वीट में लिखा है कि राज्य में जो नियोजित शिक्षक हैं और लाखों STET/CTET क्वालिफाइड शिक्षक अभ्यर्थी सालों से सरकार की लचर नियमावली एवं बहाली प्रक्रिया के कारण बेरोजगार बैठे हैं. रिक्तियां लाखों में हैं, लेकिन बहाली की प्रक्रिया अबतक सुदृढ़ नहीं हो पाई है, जिसका सीधा असर बिहार की शिक्षा व्यवस्था और नौनिहालों के भविष्य पर पड़ रहा है। बीपीएससी के माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया जारी है और इसी बीच सरकार द्वारा 11 दिनों में अबतक शिक्षक भर्ती नियमावली में 8 संशोधन हो चुके हैं, आने वाले दिनों में न जानें और क्या-क्या बदलाव होंगे....! कुल मिलाकर नीतीश कुमार ने बिहार को पूरी तरह से क्षत-विक्षत कर देने का मानो ठेका ही ले लिया है.
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