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बिहार : ठेकेदार रिशु श्री के ठिकानों से ईडी ने 33 लाख नकद और डिजिटल साक्ष्य किए बरामद

Patna :  बिहार-झारखंड समेत देशभर में भ्रष्टाचार और अवैध कमाई के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार जारी है. इसी कड़ी में बुधवार को ईडी की टीमों ने राज्य के बड़े ठेकेदार रिशु श्री के खिलाफ कार्रवाई की. ईडी ने उनके पटना, अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम और नई दिल्ली के कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान एजेंसी ने उनके ठिकानों से 33 लाख नकद, मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डायरी और कई दस्तावेज बरामद किए. ईडी के अनुसार, डायरी में कमीशन और संदिग्ध भुगतान का ब्यौरा मिला है.   

 

जांच अभी जारी, बड़े खुलासे की संभावना

एजेंसी का कहना है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से रिशु श्री और उनके नेटवर्क से जुड़े भ्रष्टाचार और अवैध लेन-देन के सबूत मिल सकते हैं.  रिशु श्री के नेटवर्क में कई सरकारी विभाग के अधिकारियों के शामिल होने का अंदेशा है. ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह मामला बड़े स्तर के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और आगामी दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है. 

 

रिशु श्री पर ठेका लेकर अवैध कमाई करने का आरोप

दरअसल स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU), बिहार ने एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें रिशु श्री और उनकी फर्मों पर बिहार सरकार के विभिन्न विभागों से ठेके और सब-कॉन्ट्रैक्ट लेकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करने का आरोप लगाया गया है.  जिन विभागों में अनियमितताएं हुई है, उनमें जल संसाधन, स्वास्थ्य, भवन निर्माण, ग्रामीण कार्य विभाग, PHED, शहरी विकास एवं आवास, BUIDCO और शिक्षा विभाग शामिल हैं.

 

ED ने SVU की प्राथमिकी पर ही अपनी जांच शुरू हुई है.  जांच के मुताबिक, रिशु श्री ने कई सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर ठेकों की राशि को अपने और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश की. एजेंसी जांच कर रही है कि रिशु श्री ने अवैध कमाई को रियल एस्टेट, लक्जरी गाड़ियों और अन्य निवेशों में कैसे लगाया.

 

पहले भी की गई है कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है, जब रिशु श्री के खिलाफ कार्रवाई की गई है.  इससे पहले ED ने पटना में कई ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों के घरों पर छापेमारी कर 11.64 करोड़ रुपये नकद और 68.09 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई थी.

 

IAS संजीव हंस मामले की जांच में रिशु श्री का नाम आया था सामने

रिशु श्री का नाम पहली बार तब चर्चा में आया, जब ED ने IAS अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच शुरू की. संजीव हंस पर आरोप था कि उन्होंने ठेकेदारों से अवैध कमाई कराई और बदले में उन्हें सरकारी ठेके दिलवाए. आरोप है कि संजीव हंस ने रिशु श्री को सरकारी ठेके दिलवाए और इसमें बदले उनसे कमीशन लिया.

 

 

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