Lagatar Desk-बिहार विधान परिषद के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय जीते बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के बीजेपी के संग जाने को लेकर सियासी विवाद उठ खड़ा हुआ है. सत्तारूढ़ भाजपा और जदयू के बीच रिश्ते में भी ही अंदर ही अंदर कड़वाहट नजर आने लगी है. इन सबके बीच विरोधी दल जन सुराज पार्टी और राजद ने बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधान परिषद के सभापति को पत्र सौंपा है. उधर जदयू ने एमएलसी चुनाव के नतीजों पर चर्चा के लिए ने 5 नवंबर को पटना में समीक्षा बैठक बुलाई है. इसमें चुनाव जीते और हारे उम्मीदवारों को भी शामिल होना है.
सोमवार को जन सुराज के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सभापति रामबचन राय को याचिका सौंपकर दोनों नवनिर्वीचित सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है. उधर राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधान परिषद में मुख्य सचेतक (विरोधी दल) अब्दुल बारी सिद्दीकी ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने का आधार बताते हुए भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) के (दल-बदल कानून) तहत अयोग्य करने की मांग की है. इससे राजनीतिक खदबदाहट बढ़ी है और बीजेपी के माथे पर बल भी पड़े हैं. साथ ही बीजेपी में शामिल होने वाले दोनों विधान पार्षद भी सवालों के घेरे में हैं.
जीत-हार का समीकरण, और जदयू को क्या खटक रहा
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों में से चार पर बीजेपी और चार पर जदयू ने उम्मीदवार उतारे थे. बीजेपी के दो उम्मीदवार नरेंद्र सिंह ने तिरहुत शिक्षक सीट और एनके यादव ने कोसी स्नातक सीट पर जीत दर्ज की है. जदयू ने चार में से एक पटना स्नातक सीट पर जीत दर्ज की है. यहां से नीरज कुमार सीट बचाने में सफल रहे. पटना स्नातक की सीट पर चुनाव राजनीतिक टसल और खींचतान के लिहाज से हाई प्रोफाइल बनी थी.
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीते बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू उम्मीदवार अभिषेक झा को हराया है. जबकि सारण टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीते डॉ राहुल राज ने जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराया है. नतीजों के बाद इन दोनों के बीजेपी में शामिल होना जदयू को यह अंदर ही अंदर खटक रहा है. बिहार जेडीययू के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का एक बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने इस विवाद पर कहा है कि बीजेपी किसे पार्टी में शामिल करती है और किसे बाहर निकालती है, यह उसका अंदरूनी मामला है. लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी को छह साल के लिए पार्टी से निकाला गया था, तो इतनी जल्दी उसे फिर शामिल करने की परिस्थिति कैसे बनी. उन्होंने एनडीए में एकता को गठबंधन की पहचान बताते हुए कुशवाहा ने कहा कि सभी सहयोगी दलों को इस पर ध्यान देना चाहिए. इस बीच पांच नवंबर को एमएलसी चुनाव को लेकर जदयू की बुलाय़ी गयी बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं.
कैसे लपका जन सुराज और राजद ने
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पार्टी कार्यालय में बंशीधर और राहुल के शामिल होने की सूचना देते हुए 31 अक्टूबर को दोनों नेताओं की फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी, लेकिन इससे दोनों की सदस्यता पर खतरे की आशंका होने पर उस पोस्ट को कम से कम 6 बार ठीक करते हुए अंतिम रूप से ये लिखा गया कि दोनों ने भाजपा का समर्थन किया है.
लेकिन दोनों के बीजेपी में शामिल होने की तस्वीरें सामने आने के साथ ही विपक्ष से राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी ने इसे लपक लिया. दोनों दलों ने बं सदस्यता रद्द करने की मांग कर दी है. सोमवार को ही बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "जब-जब भाजपा पर सवाल उठते हैं, तब-तब ये लोग संविधान को कुचलने और लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास करते हैं. यह बिल्कुल स्पष्ट है कि कोई भी निर्दलीय एमएलसी निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ले सकता। यदि वह ऐसा करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है. इन दोनों की एमएलसी सदस्यता समाप्त होनी चाहिए, अन्यथा संविधान को फाड़कर फेंक दो."