- आतंकवाद के पीड़ित उसके साजिशकर्ताओं के साथ नहीं बैठते
- चीन और पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्ते सामान्य नहीं
Goa : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की मौजूदगी में पाकिस्तान पर बड़ा हमला किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगातार घट रही है. चीन और पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्ते सामान्य नहीं हैं. सीमा पर हालात सुधरने तक ये रिश्ते सामान्य हो भी नहीं सकते. बैठक के बाद जयशंकर ने पाक विदेश मंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि वे यहां आतंक की इंडस्ट्री का प्रवक्ता बनकर आए. आतंकवाद के पीड़ित और पोषण करने वाले साथ नहीं बैठ सकते हैं. जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के साथ सिर्फ और सिर्फ पीओके ही मुद्दा है. जयशंकर ने कहा, SCO सदस्य देश के विदेश मंत्री के तौर पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के साथ बाकी सदस्य देशों के विदेश मंत्री की तरह ही व्यवहार किया गया. लेकिन आतंकवाद के प्रोमोटर, प्रोटेक्टर और आतंक के इंडस्ट्री के प्रवक्ता के तौर पर उनका काउंटर किया गया.
बैठक में भारत ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा
एससीओ की बैठक के दौरान अपने संबोधन में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया और परोक्ष रूप से पाकिस्तान को निशाने पर लिया. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद का कहर जारी है. हमारा ये मानना है कि किसी भी तरह से आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता और इसे रोका जाना चाहिए. इसमें सीमा पार से आतंकवाद और अन्य सभी तरह का आतंकवाद शामिल है. एससीओ की बैठक का मूल उद्देश्य आतंकवाद से मुकाबला है.
जुलाई में समूह के वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा भारत
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने एससीओ शिखर सम्मेलन घोषणा के रूप में नयी दिल्ली घोषणा पत्र और कट्टरता रोकने पर सहयोग, रणनीति, मोटे अनाजों को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अनुकूल जीवनशैली और डिजिटल परिवर्तन पर चार संयुक्त घोषणा का भी प्रस्ताव दिया है. एससीओ के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में, भारत जुलाई में समूह के वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. जयशंकर ने अंग्रेजी को एससीओ की तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार करने की भारत की लंबित मांग के लिए सदस्य देशों का समर्थन भी मांगा. वर्तमान में रूसी और चीनी एससीओ की आधिकारिक भाषाएं हैं. जयशंकर ने स्टार्ट-अप और नवाचार तथा पारंपरिक चिकित्सा पर दो नए कार्य समूहों के गठन को लेकर भारत के प्रस्ताव के लिए सदस्य देशों के समर्थन की भी सराहना की.
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