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NTPC सीबी माइंस क्षेत्र में बिरहोर बच्ची की मौत, परिजनों ने कहा- धूल-गर्दा ने ली जान

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बिरहोर समुदाय के लोगों ने सीबी माइंस प्रबंधन पर उठाए सवाल

Keredari (Hazaribagh): केरेडारी प्रखंड क्षेत्र के चट्टी बरियातू पंचायत के पगार गांव के बिरहोर टोला निवासी किरण बिरहोर उम्र दस वर्ष अब इस दुनिया में नहीं रही. उसके पिता पिता बीरु बिरहोर बताया कि उनकी बिटिया की मौत 28 फरवरी की रात में हो गई. उन्होंने कहा कि किरण माइंस से उड़ रहे धूल-गर्दा के कारण बीमार पड़ गई थी. इलाज़ के लिए केरेडारी स्वास्थ केंद्र ले गए. जहां उचित इलाज का व्यवस्था नहीं होने से वापस लौट गए. फिर किरण की मौत हो गई. [caption id="attachment_853483" align="alignnone" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/02/3-25.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> मृत बच्ची की तस्वीर[/caption] वहीं बिरहोर टोला की वार्ड सदस्य ममता ने बताया कि माइंस हमलोगों के कॉलोनी के एक दम पास में है. जिस कारण रात दिन कोयले का गर्दा उड़ते रहता है. उड़ते गर्दा से सब लोग प्रदूषण का शिकार हो कर बीमार पड़ रहे हैं. साथ ही जब से चट्टी बरियातू कोल माइंस खुला है तब से हैवी ब्लास्टिंग कर कोयला निकाला जाता है. जोरदार धमाका से भी लोग बीमार पड़ रहे हैं. [caption id="attachment_853481" align="alignnone" width="688"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/02/1-37.jpg"

alt="" width="688" height="1024" /> शुभम संदेश अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी खबर[/caption] ग्रामीण सुमंती बिरहोर ने कहा कि माइंस नजदीक होने के कारण जोरदार ब्लास्टिंग से और कोयला के उड़ते गर्दा से बिरहोर परीवार के कई लोग बीमार पड़ रहे हैं. जिनकी कभी सुधि एनटीपीसी चट्टी बरियातू प्रबंधन द्वारा नहीं लिया गया.

मुखिया ने घटना पर जतायी चिंता

वहीं यहां के मुखिया झरी लाल महतो ने कहा कि दस वर्षीय किरण बिरहोर की मौत से वे दुखी हैं. जब से चट्टी बरियातू में कोल माइंस संचालित है...तब से बिरहोर परिवार इनफेक्टेड है. सरकार की ओर से कोई शुद्धि लेने वाला नहीं है. उन्होंने मांग की कि आदिम जनजाति परिवारों को माइंस क्षेत्र से अन्य किसी बिरहोरों के अनुकूल स्थान पर बसाना चाहिए. ये जनजाति समुदाय के लोग विलुप्त होने की कगार पर हैं. इनके वंश की वृद्धि होती रहे और जीवन अनुकूल वातावरण मिले.

ग्रामीणों की व्यथा

घटना पर ग्रामीणों चिंता और दुख व्यक्त किया है. कहा कि चट्टी बरियातू कोल माइंस खुले  वर्षों बीत रहे हैं, लेकिन प्रबंधन बिरहोर परिवारों को माइंस क्षेत्र से बाहर बसाने की उचित पहल नहीं कर रही है. समय रहते आदिम जनजाति बिरहोर परिवारों को माइंस क्षेत्र से बाहर उनके सुरक्षित वातावरण में नहीं बसाया गया तो आदिम जनजाति परिवारों का दुखद अंत तय है.

ऑफिसियल कोट

इस संबंध में ऋतिक कंपनी के प्रेसिडेंट संतोष कुमार ने कहा कि बिरहोर बच्ची की मौत धूल- गर्दा से नहीं हुई है. वह पहले से बीमार थी. उन्होंने यह भी कहा कोई अखबार नहीं छाप रहा है तो शुभम संदेश को छापना जरूरी है क्या..हमारे आदमी रवि सिंह सुबह आपसे बात कर लेंगे.

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