Ranchi : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया. सम्मेलन “डिजिटल युग में प्रबंधन की पुनर्परिभाषा: नए प्रतिमान, नवाचार, कार्यप्रणालियां और संभावनाएं” विषय पर आयोजित किया गया.
केंद्रीय सभागार में आयोजित इस सम्मेलन ने शिक्षाविदों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और प्रशासकों को एक साझा मंच पर लाकर डिजिटल शासन और नवाचार-आधारित विकास के भविष्य पर गहन विमर्श का अवसर प्रदान किया. सम्मेलन का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना के नेतृत्व में पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा (2015 बैच) की अधिकारी एवं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी अनन्या मित्तल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जिंदल स्टील लिमिटेड के सहायक उपाध्यक्ष एवं कोयला प्रबंधन समूह प्रमुख राजीव रंजन उपस्थित रहे. विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजय झा एवं आयोजन सचिव डॉ. सुजाता प्रियंबदा दास ने स्वागत भाषण एवं सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की.
कुलपति प्रो. मन्ना ने अपने संबोधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास, विशेषकर अंतरिक्ष एवं रॉकेट तकनीक में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल हस्तक्षेप और नवाचार-आधारित अध्ययन अब आधुनिक प्रबंधन की आधारशिला बन चुके हैं. उन्होंने सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर क्रियात्मक प्रगति का उत्प्रेरक बताया. इस दौरान 110 शोध-पत्रों के सार-संग्रह ग्रंथ का विमोचन भी किया गया.
मुख्य व्याख्यान में अनन्या मित्तल ने महिला सशक्तिकरण और पूर्वानुमान-आधारित शासन के माध्यम से राष्ट्रीय रूपांतरण पर प्रकाश डाला. उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि डिजिटल विस्तार ग्रामीण झारखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है—
32 लाख महिलाएं मिशन नेटवर्क से जुड़ी हैं.
3.20 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं.
998 समूह-स्तरीय महासंघों को संरचित वित्तीय सहयोग मिल रहा है.
120 कृषक उत्पादक संगठन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना रहे हैं.
उन्होंने कहा कि शासन प्रणाली अब प्रतिक्रियात्मक मॉडल से आगे बढ़कर पूर्वानुमान-आधारित मॉडल की ओर अग्रसर है, जहां डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से योजनाओं और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो रहा है. “पालाश स्टोर” पहल को उन्होंने ग्रामीण महिला उद्यमिता के सशक्त उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया.
विशिष्ट अतिथि राजीव रंजन ने कोयला एवं खनन जैसे भारी उद्योगों में तकनीक-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला और बुद्धिमान परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को क्रमिक सुधारों के बजाय मूलभूत विकास की दिशा में कार्य करना चाहिए. उनके अनुसार, आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से मानवीय त्रुटियों को कम कर संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है.
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में निम्न प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई—
उत्तर-डिजिटल विश्व में नवाचार-प्रेरित प्रबंधन
बुद्धिमान परिवहन एवं आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वस्तु-संयोजक प्रौद्योगिकी के साथ सतत विकास रणनीतियां
भावी नेतृत्वकर्ताओं के सशक्तिकरण हेतु शैक्षिक सुधार
प्रथम पूर्णाधिवेशन सत्र City University of New York के मैनहैटन सामुदायिक महाविद्यालय की प्रोफेसर शमीरा सोरेन मालेकर द्वारा “भविष्य का निर्माण: प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के संगम पर नवाचार” विषय पर संचालित किया गया. द्वितीय पूर्णाधिवेशन सत्र आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर देवाशीष दास गुप्ता द्वारा “डिजिटल युग में विपणन नेतृत्व की पुनर्परिभाषा” विषय पर आयोजित हुआ.
सम्मेलन का समापन शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक उत्तरदायित्व के संकल्प के साथ हुआ. इस अवसर पर अध्यक्ष प्रोफेसर सुप्रियो रॉय, संयोजक डॉ. नीरज मिश्रा एवं संयुक्त संयोजक डॉ. सत्यजीत महतो की सक्रिय भूमिका रही.
संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. आनंद प्रसाद सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. सम्मेलन ने डिजिटल सिद्धांत और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए भविष्य-तैयार पेशेवरों के निर्माण की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.
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