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बीजेपी और कांग्रेस को भेदना होगा चक्रव्यूह

Pravin Kumar Ranchi : राज्य में चुनावी फिजा में वैसे तो कई मुद्दे हैं, जिसे लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने है. लेकिन लैंड बैंक का एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर दोनों दलों ने चुप्पी साध रखी है. राज्य में गठबंधन की सरकार ने लैंड बैंक को खत्म करने का वादा किया था. कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी इस मसले पर निर्णय लिया गया था कि कि लैंड बैंक को खत्म करने की दिशा में पहल की जाएगी. कांग्रेस ने वर्ष 2021 में विधायक दल की बैठक में पिछड़ों को 27% आरक्षण, विस्थापन आयोग का गठन करने, नयी नियोजन नीति में सुधार कर इसे दुरुस्त करने, लैंड बैंक की भूमि वापसी जैसे कई मुद्दों पर निर्णय लिया था. ये मुद्दे राज्य के आदिवासी मूलवासियों के लिए काफी अहम मुद्दे रहे हैं. बता दें कि रघुवर दास की सरकार ने लैंड बैंक बनाने का फैसला किया था. झारखंड में पांच जनवरी 2016 को लैंड बैंक बनाने की शुरुआत की गयी थी. इस बैंक के माध्यम से राज्य में निवेश करनेवाले निवेशकों को जमीन देना मकसद था. लैंड बैंक में 861013.19 एकड़ जमीन को शामिल किया गया था. दावा किया गया था कि पूंजी निवेश के आमंत्रण की राह इससे आसान होगी. लेकिन आज तक न तो कोई निवेश हुआ और न ही उद्योग लगे. इसे भी पढ़ें - फेक">https://lagatar.in/ats-team-raided-giridih-regarding-fake-currency-note-counting-machine-recovered/">फेक

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लैंड बैंक बनने के साथ ही शुरू हो गया था विरोध

लैंड बैंक के बनने के साथ ही आदिवासी समूहों ने इसका विरोध करना शुरू किया था. लैंड बैंक में तत्कालीन रघुवर सरकार ने गैर-मजरूआ आम और खास जमीन को शामिल किया था, जिस पर ग्रामीणों का लंबे समय से कब्जा है. ग्रामीण अपनी आजीविका के लिए खेती करते आ रहे हैं. परती, सरना, चर्च, मंदिर, भूतखेता, डाली कतारी और गांव का रास्ता भी लैंड बैंक में शामिल किया गया था. ग्रामीणों को यह लगा कि सरकार उनकी जमीन, चर्च, मंदिर, रास्ता खत्म करना चाहती है. खूंटी में पत्थलगड़ी आंदोलन के पीछे जो कारण रहा, उसमें लैंड बैंक का विरोध भी एक था. खूंटी जिले के दर्जनों गांवों में काला झंडा लगा कर आदिवासियों ने लैंड बैंक का विरोध किया था. लैंड बैंक का मुद्दा हमेशा से आदिवासियों के लिए संवेदनशील रहा है.

लैंड बैंक की जमीन जल्द मुक्त करेगी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर लैंड बैंक को लेकर कहते हैं कि हमारी सरकार संवेदनशील है. किसी को भी लैंड बैंक की जमीन नहीं दी गई. सार्वजनिक और गैरमजरुआ जमीन को लैंड बैंकिंग से मुक्त करने की बात हमारी सरकार की थी. इस पर काम चल है और जल्द ही लैंड बैंक की जमीन को सरकार मुक्त करेगी.

लैंड बैंक में शामिल जमीन

गैरमजरुआ खास (पूरी तरह से सरकारी)- 861013.19 एकड़ लैंड बैंक में शामिल गैरमजरुआ खास जमीन की बात करें, तो इसमें 1-51 एकड़ के 230,700 प्लॉट हैं. इसी प्रकार 51-100 एकड़ वाले 4137 प्लॉट, 101-150 एकड़ वाले 438 प्लॉट और 200 एकड़ से अधिक वाले 372 प्लॉट शामिल हैं. सबसे ज्यादा पश्चिम सिंहभूम और गुमला की जमीन को लैंड बैक में शामिल किया गया था. गैरमजरुआ आम (आमलोगों की जरूरत के लिए)- 211846.42 एकड़ फॉरेस्ट लैंड (इसका उपयोग वनों के विकास के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सकता) - 998065.42 एकड़ विभिन्न विभागों के पास- 83068.48 एकड़ इसे भी पढ़ें - वर्ल्ड">https://lagatar.in/world-gold-council-report-women-in-india-have-about-21-thousand-tonnes-of-gold/">वर्ल्ड

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