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भाजपा नेता भूल गए कि पारसनाथ को पर्यटक स्थल रघुवर सरकार ने घोषित किया था : सुप्रियो

  • कहा - सम्मेद शिखर जी की पवित्रता भाजपा ने भंग की
Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राष्ट्रीय मीडिया में चल रही इस खबर पर घोर आपत्ति व विरोध किया है कि  जैन धर्म की आस्था का केंद्र सम्मेद शिखरजी को हेमंत सरकार ने पर्यटन स्थल घोषित किया. मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पारसनाथ स्थित सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने को लेकर रघुवर सरकार के समय दो गजट जारी हुए थे. राष्ट्रीय मीडिया को यह जानना चाहिए. सुप्रियो ने कहा, पाखंड करने वाले भाजपा नेता भूल गए कि पारसनाथ को पर्यटक स्थल पूर्ववर्ती रघुवर सरकार और केंद्र की मोदी सरकार ने घोषित किया था. भाजपा झूठ और फरेब की राजनीति करती है, यह अब सार्वजनिक हो गया है.

रघुवर और मोदी सरकार ने किया पर्यटन स्थल घोषित

सुप्रियो ने कहा कि रघुवर सरकार के समय झारखंड सरकार के पर्यटन, कला संस्कृति व खेलकूद विभाग ने 22 अक्टूबर 2018 को कार्यालय आदेश जारी किया था. इसमें लिखा कि पारसनाथ स्थित सम्मेद शिखर जी सदियों से जैन धर्म का पवित्र व पूजनीय स्थल है. इसकी पवित्रता अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. रघुवर दास के समय ही 26 फरवरी 2019 को विभाग ने एक गजट प्रकाशित किया. इसमें गिरिडीह के पारसनाथ को पर्यटन स्थल घोषित किया. इसी गजट के आधार पर केंद्र की मोदी सरकार ने 2 अगस्त 2019 को पारसनाथ को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया.

जैन धर्म के लोगों से सार्वजनिक तौर पर माफ मांगे भाजपा

सुप्रियो ने कहा कि हेमंत सरकार ने तो 20 दिसंबर को ही जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल से कहा था कि राज्य सरकार जैन धर्म की भावना का ख्याल रखेगी. 21 दिसंबर को विभाग ने गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक को सम्मेद पर्वत को अक्षुण्ण बनाए रखने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली व गुजरात में जैन समाज के लोगों ने नाराजगी जताते हुए जुलूस निकाला, तो उसे ध्यान में रख कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अब तक क्यों नहीं पहल की. जैन समाज सहित बौद्ध और अल्पसंख्यक समाज के लोगों को समझना पड़ेगा कि भाजपा इनके खिलाफ है. झामुमो मांग करता है कि जैन धर्म के लोगों से भाजपा सार्वजनिक तौर पर माफ मांगे.

हम सभी समाज और धर्मों का सम्मान करते हैं, सरकार लेगी निर्णय- हेमंत सोरेन 

इस बीच सम्मेद शिखर जी मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपना पक्ष रखा है. प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, इस मसले पर वे विशेष बात नहीं कर पाएंगे, क्योंकि मामले को उन्होंने बहुत अंदर तक नहीं देखा है. भारत सरकार द्वारा जो गजट प्रकाशित हुआ है, उसे देखना होगा. यह फैसला किस संदर्भ में लिया गया है, इसकी जानकारी लेनी होगी. कहा कि इस पर चिंता की आवश्यकता नहीं है. उनकी सरकार सभी समाज और धर्मों का सम्मान करती है. सरकार हर किसी की भावना को ध्यान में रखेगी. सरकार पूरे मामले को देखकर ही कोई निर्णय लेगी. इसे भी पढ़ें – गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-it-is-necessary-for-the-pilgrimage-site-to-be-safe-for-the-protection-of-saints-and-culture-jain-sage/">गिरिडीह

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