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बोकारो : रामनवमी पर कसमार में महावीरी पताकाओं के साथ निकला जुलूस समेत 2 खबरें

Bokaro : बोकारो, चास और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को रामनवमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई. कसमार प्रखंड के विभिन्न गांवों में त्योहार उत्सवी माहौल में मनाया गया. कसमार चौक स्थित बजरंगबली मंदिर, मोचरो, मंजुरा, गर्री, तेलमुंगा, बगदा, खैराचातर, सिंहपुर, सुरजुडीह, दांतु, धधकिया में बजरंगबली की पूजा-अर्चना की गई. दोपहर में कसमार चौक महावीर मंदिर परिसर से महावीरी पताकाओं के साथ श्रद्धालुओं ने जुलूस निकाला. जुलूस दुर्गा मंडप, रजवार टोला, गोस्वामी टोला, बाजार टांड़ होते हुए प्रखंड कार्यालय तक गया. जुलूस को जगह-जगह रोककर श्रद्धालुओं ने महावीरी झंडे की पूजा की. जुलूस में शामिल लोग लाठी, तलवार, भाला व अन्य परम्परागत हथियारों से लैस थे. जगह-जगह लाठी खेल व तलवारबाजी का करतब कलाकारों ने दिखाया. सभी लोग माथे पर केसरिया पट्टी बांधकर रामलखन जानकी जय बोलो हनुमान की, जय श्री राम के नारे लगाते चल रहे थे. रास्ते में अखाड़ों की ओर से श्रद्धालुओं के शरबत, गुड़ व चना आदि व्यवस्था की गई थी. बीडीओ अनिल कुमार, सीओ सुरेश कुमार सिन्हा व थाना प्रभारी भजनलाल महतो जुलूस पर खुद निगरानी रख रहे थे. चौक-चौराहों पर पुलिस के जवान मुस्तैद दिखे.

मंजुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रम, झूमर गीतों पर खूब झूमे लोग

[caption id="attachment_874827" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/04/manjura.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> मंजुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार[/caption] Bokaro : कसमार प्रखंड के मंजुरा गांव में सरहुल के अवसर पर मंगलवार की रात कुड़मी समाज की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ. पश्चिम बंगाल के कुड़माली लोकगीत गायक भोलानाथ महतो, ममता महतो व राजदूत महतो की टीम ने एक से बढ़कर एक कुड़माली झूमर व अन्य गीतों की प्रस्तुति दी. झूमर गीतों पर लोग खूब झूमे. कार्यक्रम की शुरुआत अखाड़ा वंदना हुई. कुडमाली नेगाचारी गुरु संतोष कटियार ने कहा कि कुड़मी जाति विशुद्ध रूप से जनजाति है, जिसके अपने आदिम लक्षण, विशिष्ट संस्कृति व भौगोलिक क्षेत्र है. अपनी विशिष्ट संस्कृति को पुनर्जीवित करने की जरूरत है. तभी कुड़मी जनजाति की पहचान सुरक्षित रहेगी. मौके पर दीपक कुमार पुनरिनयार, राजेन्द्र महतो, मुरली पुनुरिआर, उमाचरण गुलिआर, टुपकेश्वर केसरिआर, प्रवीण केसरिआर, सहदेव टिडुआर, पीयूष बंसरिआर, महावीर गुलिआर, ज्ञानी गुलिआर, भागीरथ बंसरिआर, मुरली जालबानुआर, सुभाष हिन्दइआर, सुलचंद गुलिआर समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे. यह भी पढ़ें : केंद्र">https://lagatar.in/central-government-strangled-the-aspirations-of-giridih-vinod-singh/">केंद्र

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