विजय कुमार झा Bokaro : आयल एंड नैचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) के सीबीएम (कोल बेड मीथेन) एसेट का बोकारो में विगत 26 वर्षों से किया जा रहा प्रयास आखिरकार रंग लाया. सीबीएम एसेट ने जीसीएस-बोकारो की सफलतापूर्वक कमीशनिंग कर इसे एसेट का पहला गैस कलेक्टिंग कम गैस कम्प्रेशन स्टेशन के रूप में बनाकर तैयार कर लिया है. इसका लक्ष्य ओएनजीसी को भारत के सीबीएम मानचित्र पर एक थोक सीबीएम उत्पादक के रूप में स्थापित करना है. जीसीएस-बोकारो ओएनजीसी और आईओसीएल का संयुक्त उपक्रम क्रमशः 80 और 20 प्रतिशत भागीदारी के साथ सीबीएम ब्लॉक के पैच-ए में एक प्रमुख उत्पादन प्रतिष्ठान है. यह देश का पहला सीबीएस गैस कलेक्शन स्टेशन है, जिसे गैस बिक्री के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जा रहा है. [caption id="attachment_606649" align="alignnone" width="300"]
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alt="" width="300" height="157" /> बोकारो में निर्मित सीबीएम गैस प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट[/caption]
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alt="" width="300" height="157" /> बोकारो में निर्मित सीबीएम गैस प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट[/caption]
441 करोड़ रुपए की लागत से अपनी तरह का पहला सीबीएम फील्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
कूप-क्षेत्र के निर्माण व पाइपलाइन से इसे जोड़ने का कार्य ओएनजीसी सीबीएम एसेट ने शुरू किया था. इसमें परियोजना के हिस्से के रूप में भूतल सुविधाओं के निर्माण के लिए मैसर्स टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और मेसर्स कॉरटेक इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के कंसोर्टियम को ओईएस दिल्ली द्वारा अनुबंधन (कॉन्ट्रैक्ट) दिया गया था. ओएनजीसी सीबीएम परिसंपत्ति के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार लगभग 441 करोड़ रुपए की लागत से यह अपनी तरह का पहला सीबीएम फील्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है, जिसे बोकारो में ओएनजीसी सीबीएम एसेट द्वारा चलाया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के अधिष्ठापन से गैस की बिक्री के लिए सीबीएम एसेट ने ऊर्जा गंगा योजना के तहत गेल के साथ पाइपलाइन कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए पहले ही समझौता किया है. इसके अलावा, कॉरपोरेट मार्केटिंग ने पांच गैस ग्राहकों के साथ संपत्ति द्वारा गैस बिक्री समझौते (जीएसए) पर हस्ताक्षर करने की सुविधा भी प्रदान की है.एक लाख मानक घन मीटर गैस की प्रोसेसिंग की क्षमता
जीसीएस (गैस कलेक्शन सेंटर) बोकारो को प्रतिदिन एक लाख मानक घन मीटर गैस की प्रोसेसिंग और 750 घन मीटर उत्पादित पानी को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है. वेल साइट सेपरेटर में मुक्त पानी के प्रारंभिक पृथक्करण के बाद 13 ट्रंक-लाइनों के माध्यम से बहने वाली 113 कुओं से उत्पादित सीबीएम गैस को जीसीएस-बोकारो से संसाधित कर बेचा जाएगा. फिलहाल 55 कुएं इस इंस्टालेशन से जुड़े हुए हैं.1996-97 में रखी गई थी नींव
उल्लेखनीय है कि ओएनजीसी ने बोकारो और झरिया की कोयला खदानों में कोल बेड मिथेन गैस की खोज 1996-97 से शुरू की थी. भारत सरकार के तत्कालीन तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री जनेश्वर मिश्र ने बोकारो में आकर इस परियोजना का शिलान्यास किया था. लगभग 26-27 वर्षों के बाद यह परियोजना अब मूर्त रूप ले चुकी है. इस परियोजना से बोकारो स्टील प्लांट, इलेक्ट्रोस्टील सहित अन्य बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जा सकेगी. साथ ही, कोयले की खपत में कमी आएगी. यह प्रदूषण रोकने की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा. यह">https://lagatar.in/bermo-ekta-mahila-sangathan-protested-in-front-of-the-block-office/">यहभी पढ़ें : बेरमो : एकता महिला संगठन ने प्रखंड कार्यालय के समक्ष दिया धरना [wpse_comments_template]