alt="" width="300" height="200" /> कथा का श्रवण करने पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़[/caption] उन्होंने कहा कि रावण भगवा पहनकर मां सीता का हरण करने आया तो वो माता सीता भ्रमित हो गई थी और वो रावण की बंदी बन गई. इसलिये ग्रंथों में कहा गया कि संतों की पहचान उनके वस्त्रों से नहीं बल्कि उनके ज्ञान से की जानी चाहिये. जो अपने पास आए जिज्ञासुओं को उसके घट भीतर ही दिव्य दृष्टि खोलकर अंतर्घट में ही ईश्वर का दर्शन करवा दे वास्तव में वो ही एक पूर्ण संत है. जब जीवन में ऐसे संत मिल जाए तो उनसे ब्रहमज्ञान को प्राप्त कर अपना जीवन धन्य करें. प्रभु की शाश्वत भक्ति को प्राप्त करें और प्रभु की भक्ति में ही जीवन जीते हुए अपना जन्म सफल करें. यह">https://lagatar.in/bermo-central-government-is-anti-government-industry-and-laborers-jaymangal/">यह
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