Search

बोकारो : संत की पहचान लिबास से नहीं उसके ज्ञान से होती है : यादवेन्द्रानंद जी महाराज

Bokaro : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बोकारो सेक्टर 1 के चारताल में 3 जनवरी से आयोजित पांच दिवसीय श्री हरि कथा का समापन शनिवार को हो गया. हरि कथा के अंतिम दिन सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी यादवेन्द्रानंद जी महराज ने कहा कि संत की पहचान उनका बाहरी वेशभूषा नहीं उनके ज्ञान से होता है. [caption id="attachment_520728" align="alignnone" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/SANT-PRAWACHAN-SRADHALU-BHEED-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> कथा का श्रवण करने पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़[/caption] उन्होंने कहा कि रावण भगवा पहनकर मां सीता का हरण करने आया तो वो माता सीता भ्रमित हो गई थी और वो रावण की बंदी बन गई. इसलिये ग्रंथों में कहा गया कि संतों की पहचान उनके वस्त्रों से नहीं बल्कि उनके ज्ञान से की जानी चाहिये. जो अपने पास आए जिज्ञासुओं को उसके घट भीतर ही दिव्य दृष्टि खोलकर अंतर्घट में ही ईश्वर का दर्शन करवा दे वास्तव में वो ही एक पूर्ण संत है. जब जीवन में ऐसे संत मिल जाए तो उनसे ब्रहमज्ञान को प्राप्त कर अपना जीवन धन्य करें. प्रभु की शाश्वत भक्ति को प्राप्त करें और प्रभु की भक्ति में ही जीवन जीते हुए अपना जन्म सफल करें. यह">https://lagatar.in/bermo-central-government-is-anti-government-industry-and-laborers-jaymangal/">यह

भी पढ़ें : बेरमो : सरकारी उद्योग और मजदूर विरोधी है केन्द्र सरकार : जयमंगल [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp