जो आपको सब महंगा मिल रहा है, इसके जिम्मेदार सरकार के गोद में बैठा कॉरपोरेट ही है!
गांव में नहीं आती स्कूल बस
ग्रामीणों ने कहा कि पुल की ऊंचाई कम होने से गांव में कोई भी बड़े वाहन नहीं पहुंच रहे है, जिसका असर शिक्षा, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ रहे है. गांव में ना तो स्कूल बस जा सकती हैं और न ही ट्रक के सहारे कोई समान. जिसके कारण लोगों को गांव से डेढ़ किमी दूर बड़ी गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती हैं. ग्रामीणों के मुताबिक यह एक बड़ी समस्या हैं जिसके कारण राधानगर में कोई शादी करना नहीं चाहता है, चूंकि बरात गांव से दूर रुक जाती हैं या फिर छोटी गाड़ियों के सहारा लेना पड़ता है. हालांकि दूसरी रास्ते भी हैं जो जर्जर हालत में है, बड़ी वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं है. क्यों कि उसके लिए पुल नहीं है. ग्रामीणों को बोकारो तक स्कूली बच्चों को पहुंचाना एवं स्कूल से ले आना पड़ता है. इसे भी पढ़ें- रांची">https://lagatar.in/the-process-of-changing-the-master-plan-of-ranchi-smart-city-begins-commercial-use-plots-will-be-smaller-the-rate-will-also-be-less/">रांचीस्मार्ट सिटी का मास्टर प्लान बदलने की प्रक्रिया शुरू, कमर्शियल यूज के प्लॉट्स होंगे छोटे, रेट भी होगा कम
रास्ते पर रेलवे ने नाकेबंदी कर दिया- ग्रामीण
ग्रामीण सुबास सरकार ने कहा कि बहुत परेशानी है. रेलवे ने नाकेबंदी कर दिया है. जबकि बबलू की मानें तो पुल के नीचे जलजमाव हो जाता हैं. जिसके कारण आवागमन बाधित हो जाता है. ग्रामीणों को अब स्थानीय सांसद पर भरोसा रह गया है कि यदि वे मामले को सदन में यदि उठाएंगे तो कल्याण हो सकता है. वहीं ग्रामीण स्वरूप दास ने कहा कि अब आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि आज संख्या कम है, आनेवाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप बड़ा होगा. ग्रामीणों ने रेलवे के खिलाफ नारेबाजी भी की. इसे भी पढ़ें- प्रशांत">https://lagatar.in/prashant-kishors-announcement-i-will-not-form-a-party-now-will-start-3-thousand-km-padyatra-in-bihar-from-october-2/">प्रशांतकिशोर का ऐलान- अभी नहीं बनाऊंगा पार्टी, 2 अक्टूबर से शुरू करूंगा बिहार में 3 हजार किमी पदयात्रा [wpse_comments_template]

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