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बोकारो : निश्चित वेतनमान को लेकर आंदोलित कॉलेज के प्रोफेसर, सरकार से नियमित करने की मांग

 
Bokaro :  लगभग पांच वर्ष पूर्व यूनिवर्सिटी द्वारा सृजित पदों पर अध्यापकों की बहाली की गई थी, लेकिन निश्चित वेतनमान झारखंड में अध्यापकों को नहीं दिया गया. जबकि सम्पूर्ण देश में एक तरह के मानदेय राशि दी जा रही है. न्यूनतम फिक्शेसन को लेकर हम लोग आंदोलन शुरू किए हैं. बहाली यूजीसी के नियमों के तहत हुई थी, जो नियमित प्रोफेसर है, उनके तरह ही काम करते हैं. सरकार काफी भेदभाव करती हैं. हम लोगों ने सरकार से कई बार अनुरोध किया. पत्र लिखकर मांग किया लेकिन कुछ नहीं मिला. अब बाध्य होकर हड़ताल पर चले गए है. इसे भी पढ़ें- धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-hepatitis-b-patients-coming-from-drinking-contaminated-water-in-the-colliery-area/">धनबाद:

कोलियरी क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हो रहे हेपिटाइटिस बी के मरीज  

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alt="" width="203" height="300" />सरकार हमें नियमित करें- डॉ. प्रभाकर

चास कॉलेज चास के दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. प्रभाकर ने कहा कि अनुबंध पर 2017 में बहाली हुई थी. यूजीसी के सभी अहर्ताओं को पूरी किया गया. इंटरव्यू हुए, तब बहाली हुई. बोर्ड ने हमलोगों को बहाली की.उसवक्त घंटी को आधार बनाया गया.अधिकतम क्लास 60 लेना था. इसके मुताबिक 36 हजार रुपए अधिकतम सैलरी मिलना था. हमलोग जिस प्रकार नियमित शिक्षक कार्य करते हैं, इस पैटर्न पर काम करते हैं लेकिन आज तक हमें नियमित नहीं किया गया. हमारी मांग है कि यूजीसी द्वारा निर्धारित न्यूनतम सैलरी दिया जाय, जिसके हम हकदार है. पिछली सरकार ने भी रेग्यूलर करने का आश्वासन दिया था लेकिन वह सरकार चली गई. जब चुनाव आया तो हेमंत सोरेन ने भी आश्वासन दिया था लेकिन हुआ कुछ नही. इसे भी पढ़ें- धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-hepatitis-b-patients-coming-from-drinking-contaminated-water-in-the-colliery-area/">धनबाद:

कोलियरी क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हो रहे हेपिटाइटिस बी के मरीज https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/professeor-2-261x300.jpeg"

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परिवार चलाने में असक्षम- डॉ. राजेन्द्र

वहीं प्रोफेसर डॉ. राजेन्द्र ने कहा कि लगातार सरकार के हम शोषण के शिकार बने हुए हैं. सरकार हमारे साथ नाइंसाफी कर रही है. हमें न्यूनतम सैलरी नहीं दिया गया है, जबकि हम समान रूप से काम करते हैं. परीक्षा से लेकर पढ़ाने तक की जिम्मेदारियों में बराबर के हिस्सेदार है. अभी 40-42 क्लास करते हैं. प्रति क्लास 600 रुपए मिलते हैं जो परिवार चलाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. सरकार हमें न्यूनतम वेतनमान दे और हमें नियमित करे. कालेज में हम नियमित के तरह हर रोज काम करते हैं लेकिन हमे उसके अनुपात में सैलरी नही दी जाती है. [wpse_comments_template]    
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