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बोकारो : खतियान की लड़ाई तय करेगी राज्य की दिशा और दशा- जयराम महतो

Bokaro : झारखंडी भाषा खतियानी संघर्ष समिति की सभा में क्रान्तिकारी नेता टाइगर जयराम महतो ने भतुआ गांव के कालीथान मैदान में कहा कि 1932 का खतियान को लागू करना करना होगा. झारखंड में नियोजन नीति, स्थानीय नीति, उद्योग नीति, विस्थापन नीति नही बनी. जिसके कारण अवसर का लाभ दूसरे प्रदेशों के लोग कर रहे हैं. वहीं उन्होंने कहा कि यह खतियान की लड़ाई है, इस नवनिर्माण की लड़ाई में सभी युवाओं को आगे आना होगा. यह निर्णायक लड़ाई होगी जो युवाओं का भविष्य और राज्य की दशा और दिशा तय करेगी. आज 22 वर्ष का झारखंड जवान ही नही सयान भी हो गया है. अपना हक और अधिकार को समझता है और लेना भी जानता है. यह झारखंड के नवनिर्माण की लड़ाई है जो सिर्फ झारखंडवासियों की होगी. जमीन से जनप्रतिनिधि तक सब बाहरी लोगों का कब्जा हो रहा है. जल, जंगल, जमीन से लेकर रोजगार तक छीना जा रहा है. रोजगार की तलाश में लोग पड़ोसी राज्य तो क्या अंडमान निकोबार तक जाने के लिए मजबूर हैं. अपने हक अधिकार और अवसर से वंचित युवा अब सरकार से लड़ने के लिए बाध्य है. युवा अब जागा है और अपना अधिकार ले कर रहेंगे. यहां के युवा दूसरे स्टेट में पलायन के लिए मजबूर हैं. यहां बिहारी संस्कृति आज भी हावी है. ये लोगो बिहार और झारखंड दोनों स्टेट में समान रूप से अवसर का लाभ उठाते हैं. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-423-cases-came-to-the-public-court-of-health-minister-banna-gupta/">जमशेदपुर:

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युवा दहेजमुक्त विवाह का लें संकल्प- जयराम महतो

वहीं उन्होंने कहा कि आप बिहार में, बंगाल में, उड़ीसा में झारखंडी भाषा को लागू नहीं कर सकते लेकिन यहां तो दरवाजा खुला है. तर्क संविधान की दी जाती है. आज भी दक्षिण भारत के राज्यों में पूर्वोत्तर भारत में हिंदी भाषा को नही अपनाया गया है क्या वो गैर संवैधानिक है. झारखंड बनने से पहले, बिहार बनने से पहले ही अंग्रेजों नें 1908 में सीएनटी एक्ट के तहत इसे स्वशासित प्रदेश के रूप में चिन्हित किया था एवं कानूनी मान्यता प्रदान की थी. आज महाराष्ट्र में रहनेवाले को मराठी, बिहारियों को बिहारी, बंगाल मे रहनेवाले को बंगाली कहते हैं तो फिर झारखंड में रहनेवाले को क्या झारखंडी कहलाने का हक नहीं है. महतो ने कहा यह राज्य पहले तो बंगाल, फिर उड़ीसा फिर बिहार के भाषा अतिक्रमण का शिकार रही है लेकिन यहां की भाषा संस्कृति इतनी समृद्ध है कि आज तक किसी से प्रभावित नही हुई है. अपनी भाषा और संस्कृति की अस्मिता को बचाये रखना होगा. यही हमारी पहचान है. इसके साथ ही दहेज एवं नशापान, जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ना है.  इसके लिए युवाओं को दहेजमुक्त विवाह का संकल्प लेना होगा. इसके लिए जो भी लड़ाई लड़नी पडेगी लड़ी जायेगी. जयराम महतो का पुपुनकी टॉल प्लाजा में भव्य स्वागत किया गया. पूर्व जिप सदस्य अनिता देवी रजवार, पूर्व प्रमुख सरिता देवी, पूर्व मुखिया नरेश महतो, आयोजन समिति के अध्यक्ष राजकिशोर महतो, बिनोद कुमार, गौतम कुमार, संदीप कुमार, जितेन्द्र कुमार, अहलाद, उज्जवल, नितेश, अभय कुमार रजवार, अरविंद महतो, मनोज महतो, सरोज महतो, अर्जुन रजवार, मुक्तेश्वर महतो, सहित सेंकड़ों लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें- गिरिडीह">https://lagatar.in/inspector-sandhya-topno-murder-case-the-smuggler-said-crush-what-you-see/">गिरिडीह

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