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युवा दहेजमुक्त विवाह का लें संकल्प- जयराम महतो
वहीं उन्होंने कहा कि आप बिहार में, बंगाल में, उड़ीसा में झारखंडी भाषा को लागू नहीं कर सकते लेकिन यहां तो दरवाजा खुला है. तर्क संविधान की दी जाती है. आज भी दक्षिण भारत के राज्यों में पूर्वोत्तर भारत में हिंदी भाषा को नही अपनाया गया है क्या वो गैर संवैधानिक है. झारखंड बनने से पहले, बिहार बनने से पहले ही अंग्रेजों नें 1908 में सीएनटी एक्ट के तहत इसे स्वशासित प्रदेश के रूप में चिन्हित किया था एवं कानूनी मान्यता प्रदान की थी. आज महाराष्ट्र में रहनेवाले को मराठी, बिहारियों को बिहारी, बंगाल मे रहनेवाले को बंगाली कहते हैं तो फिर झारखंड में रहनेवाले को क्या झारखंडी कहलाने का हक नहीं है. महतो ने कहा यह राज्य पहले तो बंगाल, फिर उड़ीसा फिर बिहार के भाषा अतिक्रमण का शिकार रही है लेकिन यहां की भाषा संस्कृति इतनी समृद्ध है कि आज तक किसी से प्रभावित नही हुई है. अपनी भाषा और संस्कृति की अस्मिता को बचाये रखना होगा. यही हमारी पहचान है. इसके साथ ही दहेज एवं नशापान, जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ना है. इसके लिए युवाओं को दहेजमुक्त विवाह का संकल्प लेना होगा. इसके लिए जो भी लड़ाई लड़नी पडेगी लड़ी जायेगी. जयराम महतो का पुपुनकी टॉल प्लाजा में भव्य स्वागत किया गया. पूर्व जिप सदस्य अनिता देवी रजवार, पूर्व प्रमुख सरिता देवी, पूर्व मुखिया नरेश महतो, आयोजन समिति के अध्यक्ष राजकिशोर महतो, बिनोद कुमार, गौतम कुमार, संदीप कुमार, जितेन्द्र कुमार, अहलाद, उज्जवल, नितेश, अभय कुमार रजवार, अरविंद महतो, मनोज महतो, सरोज महतो, अर्जुन रजवार, मुक्तेश्वर महतो, सहित सेंकड़ों लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें- गिरिडीह">https://lagatar.in/inspector-sandhya-topno-murder-case-the-smuggler-said-crush-what-you-see/">गिरिडीह: पुरानी पेंशन योजना कैबिनेट से पारित होने पर शिक्षक संघ ने शुरू की आभार यात्रा [wpse_comments_template]

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