Bokaro : रेलवे विस्तारीकरण के नाम पर विस्थापित रैयतों के खिलाफ चलाए गए बुलडोजर के बाद बेघर हुए धनघरी बस्ती के दर्जनों परिवार लगातार 13 दिन से धरने पर हैं. लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने इनकी समस्याओं के निराकरण के प्रति संवेदना नहीं दिखाई. बता दें कि धनघरी गांव के लगभग 16 परिवार का जमीन वर्तमान में रेलवे में चला गया है. रेलवे अब इन विस्थापित रैयतों को अतिक्रमणकारी मान रही है. मालूम हो कि यह विस्थापित रैयत अपनी जमीन को बोकारो स्टील प्रबंधन को विस्तारीकरण के लिए दे दिया था, लेकिन बीएसएल ने जमीन तो ले ली लेकिन इन विस्थापितों को पुनर्वासित नहीं कराया. इस बीच मुआवजे की राशि भी नही दी गई. रैयत पुनर्वासन के लिए अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर काटते रहे हैं. पीड़ित कमाल खां ने बताया कि हमारी भूमि को बिना पुनर्वासित किए खाली करा दी गई. जबरन जेसीबी से घरों को तोड़ दिया गया. इसे भी पढ़ें–गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-state-highway-will-be-constructed-from-chatro-to-jamua-road-soon/">गिरिडीह
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