Bokaro : विद्यार्थियों में शास्त्रीय संगीत की भावना जागृत करने के उद्देश्य से दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) चास में शुक्रवार 21 अप्रैल को स्पिक मैके (सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर एमांगस्ट यूथ) संस्था की ओर से शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें अंतरराष्ट्रीय बांसुरी वादक चेतन जोशी, प्रसिद्ध तबला वादक विश्वजीत पॉल की संगत ने सभी का मन मोह लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन स्कूल की कार्यवाहक प्राचार्या दीपाली भुस्कुटे व विशिष्ट अतिथि डॉ.समीर चंद्र सेठ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इसके बाद कार्यवाहक प्राचार्या दीपाली भुस्कुटे ने बांसुरी वादक चेतन जोशी, उनके शिष्य सुमित चंद्र सेठ, तबला वादक विश्वजीत पॉल को सम्मानित किया. कार्यक्रम के दौरान चेतन जोशी ने कहा कि भारतीय कला और संस्कृति को सहेजने व आने वाली पीढ़ी भारतीय परंपरा को जान सके, उससे जुड़ सके इसी उद्देश्य को लेकर स्पिक मैके संस्था की स्थापना की गई है. उन्होंने कहा कि सभी वाद्ययंत्रों में बांसुरी ही है, जो दुनिया के हर कोने में पाई जाती है. हड़प्पा संस्कृति में 30 हजार साल पुरानी मिट्टी की बनी बांसुरी मिली थी. यही नहीं, एस्टोनिया देश में 60 हजार साल पुरानी बांसुरी मिली थी. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अलहइया बिलावल यानी सुबह की राग, रूपक ताल सहित कई प्रकार के लय के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बांसुरी की धुन पर ‘’सारे जहां से अच्छा, हिन्दुस्तां हमारा हमारा” गीत सुनाया. इस दौरान विद्यालय के सभी बच्चे भी बांसुरी की धून के साथ-साथ ’सारे जहां से अच्छा, हिन्दुस्तां हमारा हमारा गीत गाया. जोशी ने कहा कि बच्चे भारत के भविष्य हैं. शास्त्रीय संगीत बच्चों को नैतिक बल प्रदान करता है. इसके सहारे वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं. मन को एकाग्र करने के तरीका शास्त्रीय संगीत में ही है. उन्होंने कहा कि संस्कृत में एक श्लोक है ‘साहित्य-संगीत-कला-विहीनः पुच्छ-विषाण-हीनः साक्षात् पशुः. इसका अर्थ होता है, जो व्यक्ति साहित्य, संगीत व कला से विहीन है, वह पशु के सामान होता है. उन्होंने कहा कि भारत में तीन कलाएं होती हैं. साहित्य कला, प्रदर्श कला और दृश्य कला. स्पिक मैके प्रदर्श कला को ज्यादा महत्व देते हुए स्कूलों में ऐसे कार्यक्रम का आयोजन करती है. कहा कि वर्तमान समय में भारतीय शास्त्रीय संगीत व कला के प्रति युवाओं का रूझान बढ़ा है. मौके पर डीपीएस चास की चीफ मेंटर हेमलता एस. मोहन ने कहा कि शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत है, इसे स्पिक मैके संस्था नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रही है. यह काफी सराहनीय कदम है. मौके पर कार्यवाहक प्राचार्या दीपाली मुस्कुटे ने कहा कि चेतन जोशी से शिक्षकों, विद्यार्थियों सहित पूरे डीपीएस चास परिवार को बहुत कुछ सीखने को मिला. कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का संचालन विप्लव दास ने किया. बता दें कि बोकारो के अंतरराष्ट्रीय बांसुरी वादक चेतन जोशी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया है. उन्हें शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया था. चेतन जोशी ने संघर्ष की बुनियाद पर सफलता की इमारत खड़ी की. इन्होंने एक ही बांसुरी में साढ़े तीन सप्तक बजाने की विशिष्ट पद्धति विकसित की है. यह">https://lagatar.in/bokaro-sail-will-become-the-first-psu-to-set-up-5g-network-in-the-steel-world/">यह
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