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बोकारो युवती लापता केस में हाईकोर्ट की टिप्पणी : SP-DIG को क्यों नहीं निलंबित किया गया?

  • 2 सप्ताह में मांगी DNA जांच की  रिपोर्ट
  • बरामद कंकाल का पोस्टमार्टम रिम्स में करने का निर्देश
  • DGP, बोकारो SP, FSL डायरेक्टर और नई SIT टीम हुए हाजिर
  • अगली सुनवाई में भी DGP, बोकारो SP और नई SIT टीम को हाजिर रहने का निर्देश

Ranchi :  बोकारो में युवती का नरकंकाल बरामद होने के मामले में गुरुवार को पुलिस के डीएसपी से लेकर डीजीपी तक झारखंड हाई कोर्ट में हाजिर हुए. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि लापरवाही के लिए केवल निचले स्तर के अधिकारियों को ही निलंबित करना काफी नहीं है, डीआइजी, एसपी, डीएसपी को भी निलंबित क्यों नहीं किया गया? 

 

कोर्ट ने आगे कहा कि नीचे के अफसरों को निलंबित करने का मतलब है कि लापरवाही हुई है. कोर्ट के आदेश के बाद जांच तेज हुई. पुरानी की जगह नई एसआईटी का गठन किया गया. और जब कोर्ट ने सीनियर अफसरों को तलब किया, तो दो दिन में ही नरकंकाल मिल गया. इसका मतलब है कि जानबूझ कर इस मामले की जांच में लापरवाही बरती गई. 

 

इससे पहले महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि मामले में पुलिस की लापरवाही को देखते हुए संबंधित थाना के 28 पुलिस पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. इस पर कोर्ट ने कहा कि यह बोकारो SP की अपनी कार्रवाई है, इस पर कोर्ट को कुछ नहीं कहना है. इसके साथ ही उपरोक्त टिप्पणी भी की.

 

हाईकोर्ट ने बरामद नरकंकाल और माता पिता का DNA सैंपल की जांच कोलकाता के सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री में करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने सरकार से 2 सप्ताह में DNA जांच की रिपोर्ट मांगी है.  

 

अदालत ने बरामद नरकंकाल का पोस्टमार्टम रिम्स में कराने का निर्देश दिया है. वहीं बोकारो से लापता युवती (18 वर्षीय) के तथाकथित कंकाल का DNA टेस्ट के लिए उसके माता-पिता का सैंपल जल्द लेने को कहा है. इस पर सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सैंपल ले लिया गया है.

 

इससे पहले कोर्ट के आदेश के आलोक में DGP, बोकारो SP, FSL डायरेक्टर और नई SIT की टीम हाजिर हुए. कोर्ट में सशरीर उपस्थित डीजीपी ने इस मामले का जल्द पटाक्षेप किए जाने का आश्वासन दिया.

 

नई SIT टीम मामले के सभी दस्तावेजों के साथ कोर्ट पहुंची थी. कोर्ट ने टीम से सवाल जवाब किया. कोर्ट ने अगली सुनवाई में भी DGP, बोकारो SP और नई SIT टीम को हाजिर रहने का निर्देश है. अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी. 

 

इससे पहले प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और अधिवक्ता शांतनु गुप्ता ने कोर्ट को बताया था कि यह कंकाल युवती का नहीं है. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में हुई.

 

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डीजीपी से पूछा था कि अब तक डीएनए टेस्ट क्यों नहीं हुआ? क्या कोर्ट के आदेश का इंतजार किया जा रहा है. जबकि कंकाल मिले तीन-चार दिन बीत चुके हैं. युवती के माता-पिता का सैंपल और कंकाल का सैंपल लेकर मात्र तीन-चार घंटा में डीएनए टेस्ट हो सकता था और इसकी रिपोर्ट भी आ सकती थी. इस मामले को क्यों देर किया जा रहा है. 

 

बता दें कि मामले में लड़की की मां की ओर से हेवियस कॉपस दायर की है. युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी. मामले को लेकर बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147 /2025 दर्ज किया गया था. 

 

उल्लेखनीय है कि एक ही थाना के 28 पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने बोकारो एसपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. एसोसिएशन ने एसपी को अक्षम बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग सरकार से की है. 

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