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Bokaro News: डीपीएस बोकारो में 'एआई की समझ और कंप्यूटेशनल थिंकिंग' पर कार्यशाला

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में जिलास्तरीय डेलिबरेशन कार्यशाला (डीएलडी) का आयोजन किया गया.
 
बोकारो जिले की खबरें

Bokaro: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में जिलास्तरीय डेलिबरेशन कार्यशाला (डीएलडी) का आयोजन किया गया. कार्यशाला में सीबीएसई द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित डेलिबरेशन (मंत्रणा) के विषय कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ (सीटी एंड अंडरस्टैंडिंग ऑफ एआई) पर गहन विचार-विमर्श किया गया. 

 

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डीपीएस बोकारो में  कार्यशाला का हुआ उद्घाटन

शिक्षकों को भविष्य की जरूरतों और तकनीकी बदलावों के लिए तैयार करने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई. इस अवसर पर जिले के 14 विभिन्न विद्यालयों के लगभग 30 प्रतिभागी शिक्षकों ने विशेषज्ञों के समक्ष अपने संस्थानों में 21वीं सदी की शिक्षा के अनुरूप उक्त विषय को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. 

 

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कार्यशाल का उद्घाटन डीपीएस बोकारो के प्राचार्य एवं सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर डॉ. ए. एस. गंगवार व कार्यशाला की सराहना समिति के विशेषज्ञों में शामिल बीआईटी मेसरा के असिस्टेंट डॉ. मनीष कुमार पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियांक सक्सेना एवं आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के सहयोगी व्याख्याता प्रो. अरुण दयाल उदय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. 


इस अवसर पर विद्यालय के वरीय उप प्राचार्य अंजनी भूषण, उपप्राचार्या शालिनी शर्मा, प्रधानाध्यापिका डॉ. सरिता गंगवार, प्रीति सिन्हा, अनिंदिता भद्रा व निमिषा रानी तथा प्रधानाध्यापक गोपाल नारायण विश्वकर्मा भी उपस्थित रहे. 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा का भविष्य : डॉ. गंगवार

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. गंगवार ने कहा कि एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग 21वीं सदी की शिक्षा के लिए मूलभूत कौशल है. अध्यापन एवं सीखने की प्रक्रियाओं में बेहतरी के लिए उन्होंने विद्यालय की कक्षा में एआई की उपयोगिता पर बल दिया. 


डेटा-आधारित होगा आनेवाला कल: डॉ. मनीष

कार्यशाला में डॉ. मनीष कुमार पांडेय ने कहा कि आने वाला समय डेटा-आधारित होगा. जितने भी तकनीकी विकास होंगे, उनमें डेटा आधार की भूमिका निभाने वाला है. भविष्य के तकनीकी बदलावों के अनुरूप संसाधनयुक्त बने रहने के लिए यह आवश्यक है की तीसरी-चौथी कक्षा के बाद से ही विद्यार्थियों को एआई एवं कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसी चीजों के लिए तैयार किया जाए. 


केस पेपर की प्रस्तुतियों पर हुई समीक्षा

कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने केस पेपर प्रस्तुत किए, जिनमें उन्होंने अपने विद्यालय के नवाचारी प्रयासों को रेखांकित करने के साथ-साथ क्लासरूम में एआई के इस्तेमाल, समस्या-समाधान कौशल और टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस को अधिक प्रभावशाली बनाए जाने पर बल दिया. 


इन विद्यालयों के शिक्षकों ने लिया हिस्सा

कार्यशाला में मेजबान डीपीएस बोकारो के साथ-साथ डीपीएस चास, जीजीपीएस बोकारो, जीजीपीएस चास, श्री अय्यप्पा पब्लिक स्कूल, आदर्श विद्या मंदिर, क्रिसेंट पब्लिक स्कूल, डीवाई पाटिल इंटरनेशनल स्कूल, होलीक्रॉस बालीडीह, होलीक्रॉस चंदनकियारी, इनोवेट पब्लिक स्कूल बेरमो, लीला जानकी पब्लिक स्कूल पेटरवार, पिट्स मॉडर्न स्कूल गोमिया, सैमफोर्ड इंटरनेशनल एकेडमी बोकारो के शिक्षकों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं.

 

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