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बोकारो : रेलवे माल गोदाम में नियमों को ताक पर रख हो रही कोयले की रैक लोडिंग

 

ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने खड़ा किया कोयले का पहाड़, उड़ती धूल से राहगीरों को परेशानी

कोयला-पत्थर तोड़ने के लिए बिना अनुमति के लगा ली चलंत क्रशर मशीन

Prakash mishra Bokaro : बोकारो रेलवे माल गोदाम में नियमों को ताक पर रखकर कोयले की रैक लोडिंग हो रही है. माल गोदाम में दो ट्रांसपोर्ट कंपनियां रेलवे रैक में कोयला की लोडिंग का काम करती हैं. इसके बाद यहां से देश के विभिन्न पावर प्लांटों को कोयला भेजा जाता है. रेलवे ने ट्रांसपोर्टरों को चार रैक के बराबर कोयले का स्टॉक रखने का परमिशन दिया है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों ने माल गोदाम के पास कोयले का पहाड़ खड़ा कर दिया है. जमा कोयले का ढेर इतना ऊंचा हो गया है कि एनएच-23 से गुजरने वालों को दूर से ही यह दिखता है. एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के कोयले का पहाड़ तो एनएच के करीब तक पहुंच गया है. वहीं, दूसरे ट्रांसपोर्टर के कयलो का ढेर बढ़ते हुए बोकारो-राधागांव रेलवे लाइन के करीब तक पहुंच गया है. तय क्षमता से अधिक कायला भंडारण करने पर रेलवे ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर एक साल में करीब एक करोड़ रुपए फाइन भी लगा चुकी है. इसके बावजूद अधिक लोडिंग के चक्कर में दोनों कंपनियां नियमों को दरकिनार कर रात-दिन कोयले की ढुलाई में लगी हैं.

कोयला जैसे दिखने वाले पत्थरों को क्रशर मशीन में तोड़कर भेजा जा रहा बाहर

रेलवे ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों को माल गोदाम में खदानों से कोयला लाकर रैक लोडिंग कर बाहर भेजने का परमिशन दिया है, लेकिन दोनों कंपनियों ने अपने-अपने स्टॉक के पास चलंत क्रशर मशीन लगा रखी है. इस मशीन में कोयला के बड़े टुकड़ों और कोयला जैसा दिखने वाले बड़े-बड़े पत्थरों को चूर किया जाता है. इसके बाद उसे स्टॉक में मिलाकर कोयले के साथ रैक पर लोड कर बाहर भेजा जा रहा है. इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने ट्रक और हाइवा से आने वाले कोयले को वजन करने के लिए वेटिंग मशीन भी लगाई है. जबकि उन्हें इसका परिमिशन नहीं है.

कोयले की ढुलाई और क्रशिंग से उड़ती है धूल

कोयले की ढुलाई और पत्थरों की क्रशिंग से रेलवे माल गोदाम एरिया की सूरत काफी खराब हो गई है. कोयला ढुलाई से रेलवे को राजस्व तो मिल रहा है, लेकिन ट्रांसपोर्ट कंपनियों के गोरखधंधे से इलाके में चारों ओर सिर्फ काली धूल ही नजर आती है. एनएच 23 के किनारे माल गोदाम के मोड़ से सिवनडीह तक कोयला डस्ट की मोटी परत जमा हो गई है. इसके चलते इधर से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.माल गोदाम में उड़ती डस्ट की वजह से उधर से बोकारो स्टील प्लांट में काम करने वाले मजदूरों ने अपना रास्ता बदल लिया है. अब वे रेलवे स्टेशन होकर प्लांट आना-जाना करते हैं.

कंपनियों पर होगी कार्रवाई, क्रशर को भी हटाया जाएगा : सीनियर डीसीएम

इस संबंध में पूछे जोन पर आद्रा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम विकास कुमार ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कंपनियों को माल गोदाम एरिया में क्रशर और वेटिंग मशीन नहीं लगानी है. दोनों मशीनों को माल गोदाम से हटवरकर कंपनियों के खिलाफ करवाई की जाएगी. साथ ही स्टॉक से अधिक कोयले रखाने की जांच होगी. उन्होंने कहा कि माल गोदाम में दो साइडिंग हैं, जांच के बाद ही पता चलेगा कि कहां पर नियमों की अनदेखी ही रही है. यह भी पढ़ें :">https://lagatar.in/doctors-strike-continued-till-noon-in-giridih-hospitals-emergency-services-restored/">

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