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बोकारो : रेलवे लाइन दोहरीकरण के विस्थापितों के पुनर्वास पर जिच बरकरार, फैसले से नाराज ग्रामीण

Bokaro : तलगडिया, तुपकाडीह रेलवे लाइन दोहरीकरण परियोजना से संबंधित मामले को लेकर बोकारो में राज्य के शिक्षा मंत्री के उपस्थिति में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद भी विस्थापन व पुनर्वास के मामले पर जिच बरकरार है .बता दें कि जिला प्रशासन के साथ इस मामले को लेकर एक बैठक हुई थी. लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा भले ही इस मामले के निराकरण के लिए रास्ता निकाल दिया गया लेकिन प्रशासन द्वारा निकाले गए इस रास्ता को मानने से धनगरी के विस्थापित रैयत इनकार कर दिये है. बता दें बीएसएल एवं रेलवे विभाग के अधिकारी भी इस बैठक में शामिल रहे. मालूम हो कि चास अंचल के धनगरी मौजा अंतर्गत प्रस्तावित रेलवे लाइन दोहरीकरण परियोजना के तहत उत्पन्न समस्याओं के संबंध में समीक्षात्मक बैठक भी की गई, जिसमें मंत्री ने सेल एवं रेलवे के अधिकारियों को आपस में समन्वय स्थापित कर समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने का निर्देश दिया. मंत्री ने कहा की ग्रामीणों को पुनर्वासित करने के बाद ही मकान को तोड़ा जाएगा. सभी विस्थापित लोगों को पुनर्वास की व्यवस्था पहले करायी जाए, वहीं जिस जगह पर उन्हें पुनर्वासित कराया जाए वह जगह बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण हो. ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन ने महज 10 विस्थापितों के लिए ही इस बैठक में निर्णय लिया.

बैठक में हुआ निर्णय

मंत्री के उपस्थिति में हुए उच्चस्तरीय बैठक में यह तय हुआ कि इन विस्थापितों रैयतो को टंडबालीडीह में 10-10 डिसमिल जमीन पर मकान बना कर इन्हें पुनर्वासित किया जाएगा. यह स्थल सड़क, पेयजल, बिजली, समेत सभी सुविधाओं से लैस होगा.

 मुआवजा राशि 1 सप्ताह के अंदर दें- मंत्री

राज्य के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने डीसी समेत सेल और रेल के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि मकान तभी तोड़े जाएंगे जब बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनर्वास किए जाते हैं. मंत्री ने कहा कि जिन लोगों को मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई है, उन्हें मुआवजा राशि 1 सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराएं.

रेलवे ने रोका था ग्रामीणों का रास्ता

रेलवे ने ग्रामीणों का रास्ता रोक दिया था. बात इससे भी नहीं बनी तो रेलवे ने इन ग्रामीणों के मकान तोड़ने के लिए तीन बार प्लानिंग की, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद एसडीएम के स्थगन आदेश के बाद अब तक तो तोड़ा नहीं गया, लेकिन इस पर आज भी जीच बरकरार है. रेलवे उक्त भूमि से विस्थापित रैयतों को बेदखल करने की हर कोशिश करती है. चूंकि दोहरीकरण परियोजना में यह बाधक है.

कई ग्रामीणों पर लटकी है विभागीय तलवार

तलगडीया-तुपकाडीह रेलवे लाइन दोहरीकरण परियोजना को लेकर जहां अतिक्रमण का सवाल है, उनमें आधा दर्जन गांव शामिल है. शामिल गांवों में महेशपुर, धनघरी, सियालगजरा, उसारडीह, शामिल हैं. रेलवे अधिकारियों को सियालगजरा में विस्थापित व्यक्ति को पुनर्वास पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया है, जबकि उसरडीह में जिला भू-अर्जन कार्यालय से समन्वय स्थापित कर सप्ताह भर के अंदर लाभुकों को मुआवजा राशि देने के आदेश दिये गए हैं, जबकि धनगरी को लेकर डीपीएलआर मेनका कुमारी को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किया गया है.

आखिर क्यों जारी है गतिरोध

भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के अंतर्गत 1956 में अधिसूचना जारी हुई. 1978 में 44 वें संविधान संशोधन में संपत्ति के अधिकार आर्टिकल 31 के तहत उसे हटा दिया गया. इसी वर्ष मौजा रानीपोखर के लगभग 1250 एकड़ भूमि सेल ने वापस कर दिया. 1984 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 का संशोधन हुआ जबकि 2013 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1884 को रद्द कर दिया गया. भूमि अधिग्रहण कानून पुनः लाया गया, जो अभी प्रभावित है. रैयतों का कहना है कि बरसों से हम लोग उस भूमि पर मकान स्थापित कर रह रहे हैं, जो 30 वर्ष से अधिक हो गया. रैयतों का कहना है की 30 वर्ष पूरा होने के बाद कानून को या उस आदेश को विलुप्त मानी जाती है. ऐसा प्रावधान है, जिसको लेकर रैयत अपना मालिकाना जता रहे है.

कहते हैं रैयत

मोहम्मद कलामुदिन अंसारी कहते हैं कि मामला न्यायालय में है. भूमि से जबरन बेदखल किया जा रहा है. हमारा मालिकाना हक़ को छीनने की कोशिश की जा रही है. इसे भी पढ़ें–गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-allegations-of-arbitrariness-on-co-landowners-dharna-continues/">गिरिडीह

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