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आज भी इतिहासकारों व पुरातत्वविदों के लिए रहस्यमय बना है बोकारो

Dinesh Kumar Pandey  Bokaro: इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए बोकारो आज भी रहस्य से कम नहीं है. यहां प्रकृति के मनोरम आंचल में कई रहस्य छुपे हुए हैं. यहां भगवान राम भी आए थे,जिनका पदचिन्ह मृगखोह में विराजमान है. गर्ग ऋषि मुनि ने अपने तपोबल से गारगा नदी बनाई थी, जबकि चेचका धाम पर भगवान विष्णु का पदचिन्ह है, जहां हजारों श्रद्धालु माथा टेकने के बाद मनोवांछित फल प्राप्त करने आते हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/76-bokaro-ram-god.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> कसमार प्रखंड में पर्यटन के विकास की संभावना तलाशने के लिए करीब तीन वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग की केंद्रीय टीम यहां आयी थी. टीम ने क्षेत्र का भ्रमण कर इसे पर्यटनस्थल के रूप में विकसित करने की बात कही थी. लेकिन तीन साल बाद भी स्थिति यथावत है. इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हो पायी है. सरकार मामूली संजीदगी दिखाती, तो कसमार के मृग खोह, सेंवाती घाटी, राम-लखन टुंगरी, दुर्गा पहाड़ी, हिसीम-केदला पहाड़ी आदि स्थलों को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. ऐतिहासिक, प्राकृतिक व धार्मिक महत्व रखने के कारण पर्यटकों को सहजता से ये मनोरम दृश्य अपनी ओर लुभाते हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/77-bokaro-ram-god.jpg"

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मृगखोह में आए थे भगवान राम

खैराचातर से तकरीबन साढ़े चार किमी दूर डुमरकुदर गांव के पास हिसीम-केदला पहाड़ी श्रंखला में मृगखोह नाम का एक चर्चित स्थल है. धार्मिक मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम का आगमन यहां हुआ था. उस वक्त प्रभु श्रीराम 14 साल के वनवास पर थे. माता सीता की मृग पाने की जिद को पूरी करने के लिए स्वर्ण मृग का पीछा करते हुए भगवान यहां आए थे. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां स्वर्ण मृग को एक खोह में प्रवेश करते देखकर श्रीराम ने तीर चलाया था. वह तीर खोह के जिस हिस्से में टकराया था, वहां से दूध की धार निकलने लगी थी. आज भी वह गुफा यहां मौजूद है, जहां से अब पानी निकलता है. बता दें कि पहाड़ी पर दो जगहों पर पदचिह्न हैं. एक पद चिह्न पर मंदिर का निर्माण कालांतर में हो चुका है. दूसरा पहाड़ की ऊंची चोटी पर स्थित है.यहां पर मंदिर और खोह के बीच झरना-नदी बहती है. प्रत्येक साल 15 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर यहां टुसू मेला भी लगता है. नव वर्ष पर पिकनिक मनाने के लिए भी यहां केवल आसपास के गांवों से ही नहीं, दूर-दूर से भी लोग पहुंचते हैं.

दो राज्यों के सीमावर्ती इलाकों पर है सेवाती घाटी

झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर सेवाती घाटी अवस्थित हैं. प्रमुख स्थलों में इसकी गिनती होती है. टुसू मेला सीमा पर लगने की वजह से दो राज्यों से महिला-पुरुषों की भीड़ उमड़ती है. झरना में टुसुओं का विसर्जन पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ होता है. इस घाटी के साथ कई धार्मिक कथा भी जुड़़ी है. घाटी में करीब 180 फीट की ऊंचाई से बहता झरना प्राकृतिक खूबसूरती की छटा बिखेरती है. यह घाटी त्रिभाषीय खोरठा, कुरमाली व पंचपरगनिया होने के साथ-साथ तीन जिलों पुरुलिया, बोकारो और हजारीबाग का सीमांकन करती है.

कई मायनों में आकर्षक है दुर्गा पहाड़ी

दुर्गापुर पंचायत स्थित दुर्गा पहाड़ी न सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती बल्कि धार्मिक-सामाजिक मान्यता के ऐतिहासिक घटनाक्रमों से जुड़ी यादें अपनी गोद में समेटी हुई है. इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की अपार संभावना है. करीब 600 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर पहुंचने के बाद लोगों को एक अजीब सा सुकून मिलता है.

भगवान विष्णु का है पदचिन्ह

बोकारो से करीब 25 किमी दूर कुम्हरी गांव है, जहां चेचकेश्वर नाथ का मंदिर है. उस मंदिर से तीन सौ मीटर दूर पहाड़ पर भगवान विष्णु का पदचिन्ह पत्थर पर है.धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु यहां आए थे. वहां सावन मास में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. पदचिन्ह पर जो माथा टेकने आते हैं, उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं. यहां भगवान शिव का मंदिर है, जहां सावन की सोमवारी को सर्प दर्शन होता है, जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. इसे भी पढ़ें- मोतिहारी">https://lagatar.in/motihari-nia-arrested-maulana-asghar-ali-used-to-operate-anti-national-activities-by-staying-in-the-mosque/">मोतिहारी

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