रूपेश ने की है नहीं सुन-बोल पाने वालों के लिए इशारों की भाषा को आवाज देने की कंप्यूटर कोडिंग
रूपेश कुमार ने नहीं सुन-बोल पाने वाले लोगों की मदद के लिए खास तकनीक पर काम किया है. गूंगे-बहरों के इशारों को आवाज में तब्दील करने का खास सॉफ्टवेयर उसने कंप्यूटर कोडिंग की मदद से तैयार किया है. इस काम में उसे लगभग तीन महीने का समय लगा. बोकारो के आशालता दिव्यांग विकास केंद्र में रह रहे दिव्यांगों की परेशानी देख उसे यह आइडिया सूझा था. उसका यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर के बाल विज्ञान कांग्रेस के लिए भी चयनित किया जा चुका है. बीएसएलकर्मी रविशंकर कुमार और बिहार में राजस्व पदाधिकारी सुनीता कुमारी के होनहार पुत्र रूपेश की शुरू से ही कोडिंग में रुचि रही है. वह आगे चलकर एक सफल कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है.श्रेयसी ने प्राकृतिक चीजों से ढूंढ निकाला मवेशियों में लंपी बीमारी का इलाज
होलीक्रॉस स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्रा श्रेयसी ने दुधारू मवेशियों में वायरल इंफेक्शन की वजह से होने वाली `लंपी` बीमारी के इलाज़ का प्राकृतिक तरीका खोज निकाला है. लगभग 20 दिनों के अपने शोध के उपरांत उसने पान पत्ता, काली मिर्च, गुड़, नमक व अन्य प्राकृतिक चीजों के मिश्रण से इस बीमारी का अचूक इलाज ढूंढा है. श्रेयसी ने बताया कि उसने इसका सफल परीक्षण भी किया और 15 दिनों के भीतर बीमारी से ग्रसित मवेशी को इससे निजात मिल गई. उसने बताया कि इस बीमारी की चपेट में आने से मवेशियों की परेशानी ने उसे उन्हें कष्ट से मुक्ति दिलाने की प्रेरणा दी. रेलकर्मी रतन कुमार सिंह एवं गृहिणी स्वर्णलता कुमारी की सुपुत्री श्रेयसी आगे चलकर मवेशियों के लिए `नो प्रॉफिट, नो लॉस` के तहत फार्मेसी का अपना स्टार्टअप विकसित करना चाहती है. यह">https://lagatar.in/bokaro-state-president-of-bjp-obc-morcha-welcomed/">यहभी पढ़े : बोकारो : भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का हुआ स्वागत [wpse_comments_template]

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