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बोकारो : बोलना कला है, लेकिन मौन रहना बड़ा तप- उपासिका वीणा

पर्युषण महापर्व का चौथा दिन वाणी-संयम दिवस के रूप में मनाया

Bokaro : चास में जैन धर्मावलंबियों ने 15 सितंबर शुक्रवार को पर्युषण महापर्व का चौथा दिन वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया.  कुलदीप टॉकीज गली स्थित श्री माणकचंदजी छालाणी भवन में आयोजित प्रवचन में उपासिका वीणा बोथरा व ममता बोथरा ने मानव जीवन में वाणी के प्रभाव और इस पर संयम रखने की महत्ता पर प्रकाश डाला. उपासिका वीणा ने कहा कि वाणी-संयम मनुष्य जीवन का आभूषण है. बोलना एक कला है, किन्तु मौन रहना बड़ा तप है. मौन मन की शांति का एक कारगर अवयव है. मौन रहकर बड़े कलह भी शांत हो जाता है. इससे आत्मिक ऊर्जा का विकास होता है तथा मानसिक व भावनात्मक शक्ति बढ़ती है. हमें अनावश्यक नहीं बोलना चाहिए. उपासिका ममता बोथरा ने कहा कि न बोलना ही मौन नहीं है, अपितु संयमपूर्वक सोच-समझकर कम शब्दों में बोलना भी एक प्रकार का मौन ही है.मौन से संप्रेषण शक्ति का विकास होता है तथा मनुष्य तनावमुक्त रहता है. कम बोलने के साथ मधुर भी बोलना चाहिए. वाणी व्यक्तित्व का आईना है. मौके पर शांतिलाल लोढ़ा, प्रकाश कोठारी, कनक जैन, आरती पारख, विनोद चोपड़ा, राजेश कोठारी, शशि बांठिया, बजरंग लाल चौरड़िया, सिद्धार्थ, अमृत, अशोक, गौरव लोढ़ा, ललिता, प्रमोद, मदन चौरड़िया, जयचंद, सुशील, अरिहंत, शशि, रेणु चौरड़िया, सरोज छलानी, राजू, सुरेश बोथरा सहित अन्य लेाग मौजूद थे. यह भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-in-rape-cases-speedy-trials-should-be-conducted-and-the-culprits-should-be-punished-sp/">गिरिडीह

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