alt="" width="300" height="166" /> इस झांकी में शामिल महादेव डूंगरिया ने कहा कि 1990 में आदिवासी दिवस घोषित किया गया था. जिसके बाद आदिवासियों को एक पहचान मिली और आदिवासी कलाकृति और इसकी संस्कृति को बचाए रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आदिवासी का प्रकृति ही पहचान है, जिसे किसी भी हालत में हमें खोना नहीं चाहेंगे. इसे भी पढ़ें- चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-dog-injures-five-year-old-girl/">चाकुलिया
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