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बोकारो : शहर ने सुना सुरेन्द्र शर्मा के व्यंग्य और हरिओम पवार की ललकार

Bokaro : बोकारो क्लब में शुक्रवार की शाम बीएसएल की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में आकर्षण का केंद्र पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा और वीररस के प्रख्यात कवि डॉ हरिओम पवार की प्रस्तुतियां रहीं. सुरेंद्र शर्मा ने `अपनी इच्छाओं को सीमाओं में बांधे रखिए, वरना ये शौक गुनाहों में बदल जाएंगे`, `दीवारों में दरारें नहीं होतीं, घर में दरारें होने से दीवारें बनती हैं`, `तमाचा मैंने मारा तो तमाचा मुझे भी खाना पड़ेगा` जैसी पंक्तियों से आज के युग में पारिवारिक संबंधों में बिखराव पर प्रकाश डाला. वहीं, हरिओम पवार ने `पाकिस्तानी गरम तवे पर हाथ सेंकना बंद करो...` सरीखे ओजपूर्ण पंक्तियों से आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान और तालिबानी अत्याचार के सूत्रधार अमेरिका को जमकर लताड़ा. ललकार भरी उनकी प्रस्तुतियों से बोकारो क्लब का पूरा सदन न केवल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, बल्कि लोग `वंदे मातरम` और `भारत माता की जय` का घोष करते रहे. संचालन कर रहीं श्रृंगार रस की सुविख्यात कवयित्री सरिता शर्मा ने `सारी दुनिया से दूर हो जाऊं, तेरी आंखों का नूर हो जाऊं`, `मां की आंखों में आंसू न देना कभी` जैसी पंक्तियों से लोगों को भाव-विह्वल कर दिया. झारखंड के दुमका के लाल नीलोत्पल मृणाल ने `दुनिया ऐसी हुआ करती थी` शीर्षक कविता के माध्यम से भारत की पारंपरिकता, गांव की आंचलिकता, लोक संस्कार और झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रस्तुतीकरण किया. उन्होंने `रील बनाने वाले लड़के` शीर्षक कविता सुनाकर युवा पीढ़ी में आए भटकाव पर कटाक्ष किया. जाने-माने हास्य कवि शंभु शिखर ने `शंभु के संग खेलो, करो ठिठोली मितवा...` पंक्तियों के बीच एक से बढ़कर एक व्यंग्य प्रसंगों की चर्चा कर सभी को खूब गुदगुदाया. पद्मिनी शर्मा ने `ढूंढो रे सांवरिया मेरा खो गया`, `तेरे लिए` शीर्षक कविताओं से समाज में नारी की भूमिका पर प्रकाश डाला. जाने-माने स्टैंडअप कॉमेडियन गौरव शर्मा ने टीआरपी की खातिर अनर्गल बहस दिखाने से संबंधित हंसगुल्लों से सभी दर्शकों को हंसाकर लोटपोट कर दिया.

    युग-युगांतर तक जीवंत रहते हैं साहित्यकार के शब्द : सांसद

बोकारो क्लब में आयोजित कवि सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि धनबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद पशुपतिनाथ सिंह, बोकारो इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अमरेंदु प्रकाश सहित सभी आमंत्रित कविजनों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. अपने संबोधन में सांसद ने गोपाल सिंह नेपाली की कविता को स्मरण करते हुए साहित्य प्रेम को अद्वितीय बताया. उन्होंने कहा कि युग-युगांतर तक साहित्यकार के शब्द बोलते हैं. उनकी कविताएं सदैव जीवंत रहती हैं. बोकारो इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी श्री प्रकाश ने बोकारो को लघु भारत बताते हुए यहां की साहित्यिक गतिविधियों के इतिहास पर संक्षिप्त प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि बोकारो शहर नहीं, एक परिवार है. उन्होंने कोरोनाकाल में ऑक्सीजन आपूर्ति से लेकर युद्धपोत के निर्माण में सेल की भूमिका पर भी चर्चा की. समारोह में जिले के उपायुक्त कुलदीप चौधरी भी उपस्थित थे. उद्घाटन सत्र का संचालन बीएसएल के जनसंपर्क पदाधिकारी शुभनीत भटनागर ने किया. इसके बाद काव्य सत्र की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई. यह">https://lagatar.in/kasmar-preparations-for-the-annual-urs-of-qurban-ali-shah-completed/">यह

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