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बोकारो: खतरे में गरगा नदी का अस्तित्व, अतिक्रमणकारियों की टेढ़ी नजर

Dinesh Kumar Pandey  Bokaro : पौराणिक धरोहर गरगा नदी का अस्तित्व खतरे में है. कभी यह नदी बोकारो ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड की धरोहर मानी जाती थी. इस नदी की वजह से इलाके के खेत हमेशा हरे-भरे रहते थे. लेकिन आज इस नदी का अस्तित्व संकट में आ गया है. अतिक्रमणकारियों की नजर अब इस नदी पड़ गयी है. नदी की जमीन पर कई जगहों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो गया है, वे इसका उपयोग निजी इस्तेमाल में कर रहे हैं. आज नदी की समुचित देखभाल नहीं हो रही हैं. नदी में शहर के नालियों की पानी बहाया जा रहा है. गंदे नालों के पानी से पूरी नदी प्रदूषित हो गयी है. लेकिन इस तरफ सरकार या प्रशासन, किसी की भी नजर इनायत नहीं हो रही हैं.

बोकारो में इसी नदी पर गरगा डैम बना हुआ है

कलौंदी बांध से निकली एक पतली धारा लगभग 35 किलोमीटर तक सफर करने के दौरान बड़ी नदी का आकार लेती है. बता दें कि दामोदर नदी (जिसे नद कहा जाता है) में पुपुनकी गांव के पास इसका संगम हुआ है. संगम स्थल पर दोनों नदियां मिलती तो हैं लेकिन दोनों के पानी का रंग अलग-अलग दिखता है. बोकारो में इसी नदी पर गरगा डैम बना हुआ है. गरगा डैम के पानी का उपयोग बीएसएल प्रबंधन करता है. यहां से को-ऑपरेटिव, चास शहर, भर्रा होते हुए पुपुनकी में दामोदर में संगम होता है.

द्वापर युग में गर्ग ऋषि की तपोभूमि से गरगा नदी की धारा निकली

कहा जाता है कि द्वापर युग में गर्ग ऋषि की तपोभूमि कलौंदी बांध (तालाब) से गरगा नदी की धारा निकली. कथा है कि गर्ग ऋषि ने कंस को मारने के लिए यहां तप किया था. भगवान श्रीकृष्ण जब अपने मामा कंस को मारने निकले थे, तब गर्ग ऋषि ने श्रीकृष्ण के पक्ष में यहां यज्ञ किया था. यज्ञ के दौरान पानी की आवश्यकता थी, तब गांव के धनी व्यक्ति कलौंदी साव ने तालाब की खुदाई शुरू कराई थी. तीन माह तक तालाब की खुदाई चली थी, करीब 50 एकड़ क्षेत्रफल में तालाब बना था. इसका नेतृत्व गर्ग ऋषि कर रहे थे.

सोने के घड़े में चांदी के सिक्के भरकर विसर्जित किया गया था

इस तालाब में एक सोने के घड़े में चांदी के सिक्के भरकर उसके ऊपर मुर्गा रखकर विसर्जित किया गया था. वह घड़ा पानी के ऊपर तैरता था. कालांतर में कलौंदी बांध की मेढ़ टूट गयी और मुर्गा सहित सोने का घड़ा उसमें बह गया. मेढ़ जहां टूटी थी वह आज भी टूटी ही है. उसकी मरम्मत का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ. यहीं से नदी का उद्गम हुआ और इसका नाम गर्ग ऋषि के नाम से पड़ा. जो आज गरगा नदी के नाम से प्रचलित है. इसे भी पढ़ें- राहुल">https://lagatar.in/rahul-is-continuously-attacking-pm-modi-said-today-pm-will-have-to-listen-to-the-public-gst-will-have-to-be-withdrawn/">राहुल

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