Bokaro Thermal : बेरमो अनुमंडल के नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट के इलाके में ग्रामीण इन दिनों महुआ चुनने में लगे हैं. परिवार के बड़े, बच्चे, बूढ़े, महिलाऐं और किशोर सभी महुआ चुनने में व्यस्त हैं. ग्रामीण खाने-पीने का समान बांधकर रात में ही घर से जंगल में महुआ चुनने निकल जाते है. हांलाकि असमय बारिश के कारण इस बार महुआ कम गिर रहा है. [caption id="attachment_607156" align="alignnone" width="300"]
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alt="" width="300" height="225" /> सांकेतिक फ़ोटो[/caption]
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alt="" width="225" height="300" /> महुआ चुनकर लौटता युवक[/caption]
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alt="" width="300" height="210" /> सांकेतिक फ़ोटो[/caption]
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alt="" width="300" height="200" /> सांकेतिक फ़ोटो[/caption]
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alt="" width="300" height="225" /> सांकेतिक फ़ोटो[/caption]
गांवों में खरीदारी करने पहुंचने लगे व्यापारी
महुआ की खरीदारी करने के लिए व्यापारी भी गांवों में पहुंचने लगे हैं. व्यापारी ग्रामीणों से महुआ खरीदकर बिहार, बंगाल, उड़ीसा और छतीसगढ़ ले जाते हैं. अभी व्यापारी 50 रूपए किलो की दर से महुआ खरीद रहें है. [caption id="attachment_607157" align="alignnone" width="225"]alt="" width="225" height="300" /> महुआ चुनकर लौटता युवक[/caption]
बच्चों की पढ़ाई में अब नहीं होती रुकावट
नावाडीह सदर गांव के गीता देवी और कंजकिरो की कौशल्या देवी अपने पति के साथ महुआ चुनने में लगी है. उन्होंने बताया कि महुआ चुनकर ही वे अपनी जीविकोपार्जन करती है. महुआ को बाजार में बेचकर उससे जो आमदनी होती है, उससे बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करती हैं. हर साल महुआ बेचकर 15 से 20 हजार रूपए कमा लेती है. इसकी ब्रिकी से दो से चार माह के राशन का भी जुगाड़ हो जाता है. [caption id="attachment_607160" align="alignnone" width="300"]alt="" width="300" height="210" /> सांकेतिक फ़ोटो[/caption]
आदिवासी जनजीवन में महुआ का महत्वपूर्ण स्थान
महुआ आदिवासी समुदाय में आर्थिक समस्याओं को दूर करने में मददगार काफ़ी होता हैं. मार्च-अप्रैल में आदिवासी महिला-पुरुष, बूढ़े-बच्चे सभी परिवार के लोग सुबह से ही महुआ चुनने में लगे रहते हैं. महुआ फूल को बेचकर जो आमदनी होती है. उससे कपड़े, बच्चों की पढ़ाई, खेती के समय रासायनिक खाद आदि में बहुत मदद मिलती हैं. [caption id="attachment_607161" align="alignnone" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> सांकेतिक फ़ोटो[/caption]
खून की कमी को करता है दूर, डायजेस्टिव सिस्टम भी होगा मजबूत
डॉ.दिलचंद ठाकुर ने बताया कि महुआ गुणकारी फल है. दांतों से खून निकलने जैसी समस्या पर महुआ पेड़ की तना से दातुन करने पर खून निकलना बंद हो जाता हैं और दांत मजबूत बनते हैं. महुआ फूल को दूध के साथ सेवन करने से ब्रेस्टफीडिंग दिक्कत दूर होगी. यह">https://lagatar.in/chandrapura-bhoomi-poojan-done-for-construction-of-life-size-statue-of-jagarnath-mahato/">यहभी पढ़ें : चंद्रपुरा : जगरनाथ महतो की आदमक़द प्रतिमा निर्माण का हुआ भूमि पूजन [wpse_comments_template]
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