संगीत मजहब और सरहद के पाबंदी से ऊपर
इशरत बताती हैं कि उन्हें महुआ चैनल में एक एलबम में गाने का मौका मिला है. इसी के साथ फिल्म ‘एक प्रेम कहानी’ और ‘तेरे इश्क के खातिर’ में गाने का मौका मिला है. उन्होंने बताया कि भजन गाने को लेकर कई बार रिश्तेदारों की नाराजगी भी झेलना पड़ी. लेकिन उसका मानना है कि संगीत मजहब और सरहद के पाबंदी से ऊपर है. उन्होंने कहा कि भक्ति जागरण कार्यक्रम में बोकारो थर्मल के भक्तो का जो प्यार मिला है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. मुंबई लौटकर यहां पर मिले प्यार को सोशल मीडिया में किस्तों में बयां करूंगी. मजहब को लेकर एक सवाल के जबाव में इशरत ने कहा कि मुझे तिल-तिल करके मत मारो....और कुछ पल जिंदा रहने, मुझे लाल-हरा में मत बांटो...मेरी छत पर तिरंगा लहराने दो.बचपन से ही संगीत में रमी है इशरत
यूपी के प्रयागराज की रहने वाली इशरत चार साल की उम्र से ही संगीत की दुनिया में रम गई थी. संगीत के प्रति उसकी रुचि और तन्मयता देख मां जीनत ने इशरत की सपनों को उड़ान भरने के लिए पंख दिया. उन्होंने प्रयागराज संगीत समिति से छह साल संगीत की क्लास ली. इसके बाद कलर्स चैनल में प्रसारित ‘शूरवीर संगीत का महासंग्राम’ में भाग लिया और इस प्रतियोगिता की विनर बनकर खुद को साबित किया. यह">https://lagatar.in/bermo-sweets-were-distributed-on-the-appointment-of-mla-kumar-jaymangal-as-the-national-vice-president-of-intuc/">यहभी पढ़ें : बेरमो : विधायक कुमार जयमंगल को इंटक का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने पर बांटी गई मिठाई [wpse_comments_template]

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