मनाई गई करम एकादशी, अखरा सजधज कर तैयार
Ram Chandra Anjana / Bokaro Tharmal : भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक लोकपर्व करमा को लेकर बेरमो कोयलांचल के ग्रामीण इलाके में उल्लास चरम पर पहुंच गया है. 24 को संयोत मनाया गया, जबकि 25 सितंबर को भाद्रपद की कर्म एकादशी की रात्रि में अखरों के समक्ष व्रती महिलाएं व किशोरी-युवतियां मुख्य पूजा में भाग लेंगी. इस दौरान कर्म व धर्म नामक दो भाइयों की कथा का श्रवण किया जायेगा. यह पर्व कर्म ही धर्म का संदेश भी देता है. वहीं 26 सितंबर को प्रातः करम डाली के विसर्जन के साथ ही इस पर्व का समापन हो जायेगा.बेरमो अनुमंडल में करमा का छाया उत्साह
बेरमो अनुमंडल के बेरमो, चन्द्रपुरा, नावाडीह, गोमिया, कसमार, ऊपरघाट के अलावा पेटरवार प्रखंड के ग्रामीण अंचलों में इस पर्व का आयोजन होता है. 18 सितंबर से ही यह पर्व शुरू है, जब किशोरी-युवतियां व महिलाएं बांस की बनी छोटी डाली ले कर तालाब-नदी व जोरिया में स्नान करने पहुंची और जलस्रोतों पर स्नान के बाद उसी डाली में बालू भर कर करमा का गीत गाते हुए वापस आई. गांव में अपने घर लौटने के पूर्व अखरा में सामूहिक रूप से करमा गीत व नृत्य किया गया. श्री गणेश, करम देव समेत कई देवी-देवताओं का आह्वान किया गया.प्रकृति का पर्व है करमा
इस पर्व के बारे में अनिता, चमेली, पूनम, बंसती आदि किशोरियां कहती हैं कि यह महापर्व प्रकृति से संबंधित है. इसके समापन पर करम पेड़ के डाल की पूजा की जाती है. प्रारंभिक दिनों में यह जनजातियों का महापर्व था. लेकिन इसकी अहमियत को देख पूरे समाज ने इसे अपना लिया. इसमें बहन अपने भाई के लिए व्रत रखती हैं. इसे भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक भी माना जाता है. मंगलवार को करम एकादशी पूजा को लेकर अखरा को सजाने की काम जोर-शोर से चल रहा है. यू-टूब्यूर निक्की महतो की करम पर रिलीज कर्णप्रिय गीत ...केकर खातिर गो बाबा अखरा सजेलि...केकर खातिर गो बाबा सात दिन एकादशी करली....हमर बिहाए गो बाबा खेतवा बेचले...भैईया के शादी में पंगड्डी बांधले....हर आखरा में गुंज रहीं है. यह">https://lagatar.in/giridih-a-young-man-who-had-gone-to-bring-flowers-for-karma-festival-died-due-to-drowning-in-the-pond/">यहभी पढ़ें: गिरिडीह : करमा पर्व के लिए फूल लाने गए युवक की तालाब में डूबने से मौत [wpse_comments_template]
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