Bokaro : देश की प्रमुख स्टील उत्पादक कंपनी वेदांता ने गोवा स्थित प्रमुख निकल व कोबाल्ट उत्पादक निकोमेट का अधिग्रहण कर देश की एकमात्र निकेल धातु उत्पादक कंपनी बन गई है. निकोमेट का अधिग्रहण वेदांता के ईएसजी मिशन के अनुरूप भारत की कार्बन तटस्थता लक्ष्यों के सहयोग की दिशा में बड़ा कदम है. निकेल स्टेनलेस स्टील और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बैटरी निर्माण में एक महत्वपूर्ण धातु है. ईवीएस, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए लिथियम-आयन बैटरी के लिए कोबाल्ट एक प्रमुख तत्व है. निकेल और कोबाल्ट दोनों खनिज का भविष्य उज्जवल है. विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता की ओर परिवर्तन के लिए निकेल व कोबाल्ट महत्वपूर्ण धातु हैं. निकेल व कोबाल्ट दोनों खनिज का भविष्य उज्जवल कुछ वर्षों के दौरान भारत में निकेल और कोबाल्ट आयात का मूल्य लगातार बढ़ा है. इन महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन में वेदांता के प्रवेश से भारत ईवी बैटरी बनाने की स्थिति में होगा, जो ईवी वाहनों के मुख्य घटक हैं. उच्च गुणवत्ता वाले स्टील उत्पादों के उत्पादन में भी दोनों खनिज का इस्तेमाल किया जाता है. वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि हम निकेल और कोबाल्ट उत्पादन में प्रवेश कर उत्साहित हैं. इससे भारत सरकार का आत्मानिर्भर भारत का सपना भी साकार हो सकेगा. वर्तमान में भारत अपनी निकेल आवश्यकताओं का 100 प्रतिशत आयात करता है. हमारा ध्यान घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर होगा जो भारत को नेट जीरो इकोनॉमी की ओर ले जाएगा. भारत निकेल का 100 प्रतिशत करता है आयात यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब हाल के वर्षों में बैटरी की मांग में वृद्धि और वैश्विक स्टेनलेस-स्टील उत्पादन में वृद्धि के साथ निकेल बाजार सीमित हो रहा है, यह 2022 तक जारी रहने की उम्मीद है. खनिज के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निकोमेट का अधिग्रहण वेदांता का महत्वपूर्ण कदम है. यह भी पढ़ें : ठंड">https://lagatar.in/cold-increased-chills-temperature-dropped/">ठंड
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बोकारो : वेदांता बनी देश की एकमात्र निकेल उत्पादक कंपनी

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