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250 साल के आदिवासियों के संघर्षं का इतिहास
वहीं डी.सी.गोहाई ने कहा कि झारखंड में पिछले 250 साल के आदिवासियों के संघर्षं का इतिहास रहा है. कभी पहाड़िया जनजाति, तिलका मांझी विद्रोह, हो विद्रोह, संथाल विद्रोह, मुंडा विद्रोह, कोल्हान विद्रोह, भूमिज विद्रोह, विल्किलसन विद्रोह ने ब्रिटिश हुकुमत को चुनौती देकर जल, जंगल, जमीन और अबुआ दिशुम अबुआ राज का संकल्प को प्रतिष्ठित किया. कालांतर में ब्रिटिश हुकुमत से अभी तक की सभी राजनीतिक सत्ता ने इनके आदिवासी समाज को हशिये पर धकेल दिया. मौके पर आदिवासी संस्कृति विकास परिषद के विनोद बिहारी सोरेन, बिरसा बासा, मुखिया राउल लियांगी, झारखंड क्रांति दल के डीसिंग हेम्ब्रम, झारखंड क्रांतिकारी महिला समिति के फूलोरा लकडा़, मजदूर संगठन समिति के अरबिंद कुमार, धर्मशीला कुमारी, रामा शंकर, धर्मनिया दिग्गा, जोहाना बारला, चांदो तोपनो उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें-दुबई">https://lagatar.in/construction-of-grand-hindu-temple-in-dubai-completed-inaugurated-on-october-5-the-day-of-dussehra/">दुबईमें भव्य हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य पूरा, दशहरा के दिन 5 अक्टूबर को उद्घाटन [wpse_comments_template]

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