Bokaro : झारखंड-बंगाल का प्रसिद्ध छऊ नृत्य की चर्चा सिर्फ भारतवर्ष में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हो रही है. इस लोकनृत्य को स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में झारखंड-बंगाल के कई चर्चित कलाकारों ने कड़ी मेहनत की है. इनमें से एक बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड स्थित खेड़ाबेड़ा गांव निवासी परीक्षित महतो भी हैं. छऊ नृत्य कलाकार परीक्षित को बुधवार को लोककला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया है. परीक्षित महतो ने इस लोक कला का प्रशिक्षण शिक्षा गुरु स्व धनंजय महतो से ली थी.

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राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने विधायक अमर बाउरी ने खुशी जाहिर की
परीक्षित महतो को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने पर नेता प्रतिपक्ष सह चंदनकियारी विधायक अमर कुमार बाउरी ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने बताया कि छऊ नृत्य कलाकार परीक्षित महतो ने राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति से सम्मानित होकर पूरे राज्य के लोगों का मान बढ़ाया है. उनकी मेहनत और लगन के कारण आज उन्हें सम्मानित किया गया है. हम सभी के लिए यह गर्व का पल है. उन्होंने परीक्षित की मेहनत और लगन को सम्मान देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया. अमर कुमार बाउरी ने कहा कि चंदनकियारी में राष्ट्रीय छऊ नृत्य प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र से आज हमारी कला संस्कृति को एक नया मुकाम मिल रहा है. आये दिन यहां पर छऊ नृत्य और अन्य कलाओं का प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है. इस केंद्र में न सिर्फ झारखंड बल्कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा सहित पूरे देश के युवा अपनी कला संस्कृति को जानने और सीखने आते हैं. निश्चित तौर पर आने वाले समय में चंदनकियारी झारखंड का सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनेगा. इसके लिए अपने स्तर से हर संभव प्रयास किया जायेगा.
छऊ नृत्य की है तीन प्रमुख शैलियां
मालूम हो कि छऊ नृत्य की तीन प्रमुख शैलियां है. इसमें मयूरभंज, सरायकेला और मानभूम शैली शामिल है. चंदनकियारी स्थित केंद्र में तीनों शैलियों पर लगातार कार्यशाला का आयोजन होता है. इससे छऊ कलाकारों को बल मिला. वहीं नई पीढ़ी के युवा भी तेजी से अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने में आगे आ रहे हैं. [wpse_comments_template]
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