Ranchi : फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की फूड सेफ्टी उप समिति की बैठक आज चैंबर भवन में आयोजित की गई. बैठक में फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ पवन कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे. बैठक में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी हालिया निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की गई.
डॉ पवन कुमार ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत 1.5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यापारियों को केवल निबंधन कराना होगा, जबकि 1.5 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक के कारोबारियों के लिए स्टेट लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. यह संशोधित व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गयी है.
उन्होंने जानकारी दी कि लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया सरल बना दी गयी है, जिससे अब व्यापारी मोबाइल रिचार्ज की तरह ऑनलाइन भुगतान कर आसानी से लाइसेंस रिन्यू करा सकेंगे.
साथ ही तत्काल लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था भी लागू कर दी गई है. राज्य में सात नए फूड सेफ्टी ऑफिसरों की नियुक्ति से अब अधिकारियों की कमी नहीं रहेगी.
बैठक में चैंबर उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने फूड सैंपल जांच रिपोर्ट में हो रही देरी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने में लगभग तीन माह का समय लग जाता है, जबकि सैंपल लेने के समय ही व्यापारियों के नाम और फोटो सार्वजनिक कर दिए जाते हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है.
उन्होंने सुझाव दिया कि जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित व्यवसायी की पहचान गोपनीय रखी जाए. साथ ही राज्य में फूड सैंपल जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशाला शीघ्र शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया. इस संबंध में विभाग को पत्र लिखने का निर्णय भी लिया गया.
चैंबर उपाध्यक्ष राम बांगड़ ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग और चैंबर के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं. सह सचिव नवजोत अलंग ने फूड लाइसेंसिंग प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने की आवश्यकता बताई, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों को राहत मिल सके.
उप समिति के चेयरमैन सुबोध चौधरी ने कहा कि व्यापारियों को नियमों का पालन करते हुए किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए चैंबर लगातार प्रयासरत है.बैठक में कार्यकारिणी सदस्य मनीष सराफ सहित सदस्य आलोक सिंह, सुनील अग्रवाल, मो. इरफान और आकाश कुमार समेत अन्य उपस्थित थे,
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