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BREAKING : नियोजन नीति से हटेगी 10वीं और 12वीं की बाध्यता, स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश का भी ज्ञान अब नहीं होगा अनिवार्य

Nitesh Ojha Ranchi: हेमंत सोरेन की सरकार अपनी ही बनाई नियोजन नीति में एक बार फिर से बदलाव करेगी. झारखंड हाईकोर्ट से नियोजन नीति रद्द होने के बाद हेमंत सरकार ने यह निर्णय लिया है. युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से राज्य सरकार नियोजन नीति में जरूरी बदलाव करेगी. बदलाव को लेकर बुधवार को मुख्य सचिव सुखदेव सिंह की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी. बैठक में कई विभागों के सचिव उपस्थित थे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नई नियोजन नीति में सरकार दो तरह के बदलाव करेगी. पहला - अभ्यर्थियों को मैट्रिक/10वीं और इंटरमीडिएट/10+2 झारखंड में अवस्थित मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान से उत्तीर्ण होने की अनिवार्य बाध्यता को खत्म किया जाएगा. दूसरा - अभ्यर्थी को स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश का ज्ञान होने की अनिवार्य बाध्यता को भी खत्म कर दिया जाएगा. यानी उपरोक्त दोनों प्रावधान अब नई नियोजन नीति से हटाए जाएंगे. दो बदलाव के साथ नयी नियोजन नीति में पूर्व की परीक्षा पैटर्न में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. बता दें कि हेमंत सोरेन ने बीते दिनों विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कहा था कि सरकार अपनी नियोजन नीति में जो संशोधन करेगी, वह युवाओं के अनुरूप ही होगी.

हाईकोर्ट ने रद्द किया था नियोजन नीति

झारखंड हाईकोर्ट ने बीते 17 दिसंबर को हेमंत सरकार की नियोजन नीति को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा लिए जाने वाले 20 से अधिक नियुक्ति विज्ञापन रद्द हो गए थे. इससे युवाओं में सरकार के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिला था. आक्रोश इतना था कि हजारों की संख्या में बेरोजगार युवाओं ने शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव किया था. [wpse_comments_template]  

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