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BREAKING : हेमंत सरकार ने सदन में पेश किया विश्वास प्रस्ताव, बीजेपी ने किया विरोध, सत्ता और विपक्ष के बीच बहस जारी

Ranchi : झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र सोमवार को बुलाया गया है. सदन की कार्यवाही 11.15 बजे शुरू हुई. कार्यवाही शुरू होते ही हेमंत सरकार ने सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश किया. इसके बाद स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने सत्ता और विपक्ष को बात रखने की अनुमति दी. जिसके बाद विपक्ष के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि झारखंड प्रदेश के लोग देख रहे है कि हेमंत सरकार कितनी मजबूत है. कभी रायपुर, कभी सर्किट हाउस, तो कभी खूंटी लतरातू डैम. एक माह के लिए 2 करोड़ रुपये के खर्च पर हवाई जहाज को किराया पर लिया गया, तो विधायक व मंत्री घुमते जाते रहे.   पढ़ें - राजनीतिक">https://lagatar.in/notice-to-the-election-commission-for-using-religious-words-in-the-name-of-a-political-party/">राजनीतिक

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लोकतंत्र को ध्वस्त करने का हेमंत सरकार ने काम किया

उन्होंने कहा कि सरकार को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं रह गया है. शिक्षक दिवस के दिन झारखंड के लोगों को आज हेमंत सरकार किस तरह की शिक्षा दे रही है, यह भी सभी देख रहे हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिना अविश्वास प्रस्ताव लाए ही हेमंत सरकार विश्वास प्रस्ताव लाने का काम कर रही है. आज लोकतंत्र को ध्वस्त करने का हेमंत सरकार ने काम किया है. विपक्ष द्वारा लोकतंत्र पर विश्वास नहीं है. इसलिए आज विधानसभा के सदन में विश्वास मत लाने का काम किया गया है. इसे भी पढ़ें - Live">https://lagatar.in/watch-live-telecast-of-special-session-of-jharkhand-vidhan-sabha-on-live-lagatar/">Live

Lagatar पर देखें झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र का सीधा प्रसारण

जनता के जनादेश पर भरोसा नहीं - सुदिव्य कुमार सोनू

सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर सवाल खड़ा करने वाले लोगों पर जनता के जनादेश पर भरोसा नहीं है. मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को गिराने वाले आज लोकतंत्र के मंदिर में बैठ कर उपदेश दे रहे हैं. आज ये बोलते हैं कि विश्वास मत क्यों. दरअसल सदन के माध्यम से हम बताना चाहते हैं कि हेमंत है तो विश्वास है. भाजपावालों को आदिवासी मुख्यमंत्री पच नहीं रहा है. आज जब आदिवासी-मूलवासी के अधिकारों को पूरा किया जा रहा है, तो भाजपा नेताओं को तकलीफ हो रही है.

विधायकों की खरीद-फरोख्त के काम में लगी- प्रदीप यादव

प्रदीप यादव ने कहा, भाजपा ने पिछले एक माह से राज्य को अस्थिर करने का काम किया है. इस अस्थिर राज्य को स्थिर करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्वास मत प्रस्ताव लाने का काम किया है, जिसका सभी सत्तारूढ़ पार्टी समर्थन करती है. उन्होंने कहा, झारखंड में पिछले चार उपचुनावों (दुमका, बेरमो, मधुपूर, मांडर विधानसभा) में मिली करारी हार के बाद भाजपा को अब कोई काम नहीं बचा है. इसलिए वह विधायकों की खरीद-फरोख्त के काम में लगी है. 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा द्वारा जेवीएम विधायकों को खरीदने का आरोप बाबूलाल मरांडी लगा चुके हैं. उन्होंने खुद कहा था कि भाजपा सत्ता पाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के अलावा कुछ भी कर सकती है. भाजपा सत्ता के लिए कितनी लोभी है, यह इससे साबित होता है कि कर्नाटक, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड की चुनी हुई सरकार को डिस्टर्ब करने का काम किया जा रहा है.

सरकार युवाओं के किए अपने वादों को जल्द से जल्द पूरा करे- विनोद सिंह

मुख्यमंत्री के रखे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए माले विधायक विनोद सिंह ने कहा, सरकार के ढाई साल से अधिक समय हो गए हैं. लेकिन आज तक स्थानीय व नियोजन नीति लेकर नहीं आयी है. उनका स्पष्ट कहना है कि सरकार युवाओं के किए अपने वादों को जल्द से जल्द पूरा करे.

सरकार को विश्वास मत हासिल करने की क्यों जरूरत पड़ी- सुदेश महतो

सुदेश महतो ने कहा, केवल सदन नहीं बल्कि पूरा राज्य देख रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि सरकार को विश्वास मत हासिल करने की क्यों जरूरत पड़ी. देखा जाए, तो यह प्रस्ताव कोई प्रक्रिया के तहत तो है नहीं. भाजपा या आजसू ने कभी भी हेमंत सरकार से विश्वास मत लाने की मांग नहीं की. दरअसल हेमंत सरकार ने यह काम अपने लोगों के लिए विश्वास हासिल करने के लिए किया है. लेकिन यह भी तय है कि सत्ता पक्ष के किसी भी नेता के चेहरे पर यह आत्मविश्वास नहीं दिख रहा है. सुदेश ने कहा, आज के सत्र में होना तो यह चाहिए था कि सरकार स्थानीय और नियोजन नीति, ओबीसी आरक्षण पर प्रस्ताव लाती तो शायद अच्छा होता.

विश्वास प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं थी- सरयू राय

सरयू राय ने कहा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सदन के नेता है. उनके पास यह अधिकार है कि वे किसी तरह का कोई भी प्रस्ताव लेकर आए. पिछले सत्र में पूछे सवाल के जवाब सही नहीं दिया गया. एक सवाल पर भी सदन के अधिकारियों का जवाब नहीं मिला. सरकार के अधिकारी सदन को गुमराह करने का काम कर रहे हैं. ऐसे स्थिति में मुख्यमंत्री ने विश्वास मत का प्रस्ताव रखा है. सवाल तो यह जरूर उठता है कि आखिर विश्वास मत की स्थिति क्यों बनी. आज हेमंत सरकार के मंत्रियो पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, मुख्यमंत्री को तो पहले मंत्रियों पर कार्रवाई करनी चाहिए. सरयू ने कहा, हेमंत सरकार के बहुमत का आंकड़ा है, उसे किसी तरह के विश्वास प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं थी.
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