Search

रिश्वत कांड : विधायकों-सांसदों को छूट के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट सुनायेगा फैसला

New Delhi : खबर है कि सांसदों और विधायकों द्वारा सदन में भाषण देने या फिर वोट के लिए रिश्वत लेने के लिए मुकदमे से छूट मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सोमवार को फैसला सुनायेगा. जान लें कि सात न्यायाधीशों की पीठ ने 1998 के फैसले पर पुनर्विचार के संबंध में 5 अक्टूबर 2023 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/#google_vignette">नेशनल

खबरों के लिए यहां क्लिक करें
जानकारी के अनुसार मामला झामुमो रिश्वत कांड से जुड़ा हुआ है. कांड के 25 साल बाद सुप्रीम कोर्ट फैसले पर दोबारा विचार कर रहा है. सात जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. बेंच में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएस बोपन्ना, एमएम सुंदरेश, पीएस नरसिम्हा, जेबी पारदीवाला, संजय कुमार और मनोज मिश्रा शामिल हैं.

 रिश्वतखोरी मुकदमे से छूट का विषय नहीं : 

केंद्र सरकार 

केंद्र सरकार ने अक्टूबर माह में में सुनवाई के क्रम में सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि रिश्वतखोरी मुकदमे से छूट का विषय नहीं हो सकती. कहा था कि संसदीय विशेषाधिकार का अर्थ किसी सांसद- विधायक को कानून से ऊपर रखना नहीं हो सकता. एक बात और कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संसद में अपमानजनक बयानबाजी को अपराध मानने का प्रस्ताव सिरे से खारिज कर दिया था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गये एक प्रस्ताव में कहा गया था कि संसद और विधानसभाओं में अपमानजनक बयान को कानून से छूट नहीं मिलनी चाहिए, जिससे ऐसा करने वालों के खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत कार्रवाई की जा सके. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि सदन के भीतर किसा भी प्रकार के दिये गये बयान पर सांसदों-विधायकों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती. कहा था कि संसद और विधानसभा के सदस्यों को सदन के अंदर बोलने की पूरी आजादी है.

राजू रामचंद्रन ने सुप्रीम कोर्ट में सीता सोरेन का पक्ष रखा रखा था

मामला सीता सोरेन पर 2012 में राज्यसभा चुनाव के लिए वोट देने के बदले रिश्वत लेने के आरोप से जुड़ा हुआ है. जानकारी के अनुसार सीता सोरेन ने अपना बचाव करते हुए तर्क दिया था कि कि उन्हें सदन में कुछ भी कहने या वोट देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत छूट मिली हुई है. इसका विरोध करते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने सीता सोरेन के मामले को दूसरे मामलों से अलग करार देते हु कहा था कि राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग का सदन की कार्यवाही से कोई संबंध नहीं है. इसलिए राज्यसभा चुनाव में वोट के लिए रिश्वत लेने के खिलाफ सीता सोरेन का मामला कानूनी दायरे में आता है. सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने सुप्रीम कोर्ट में सीता सोरेन का पक्ष रखा रखा था. [wpse_comments_template]  

Comments

Leave a Comment