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Exclusive: 22 करोड़ की लागत से बना पुल क्षतिग्रस्त हुआ पर ACB को कोई दोषी नहीं मिला

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Ranchi: 22 करोड़ की लागत से धनबाद में बने पुल के क्षतिग्रस्त होने के मामले में ACB को कोई दोषी नहीं मिला. मामले की जांच के बाद ACB ने मामले में तथ्यों की भूल बताते हुए कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट जमा कर दिया है. कोर्ट ने इसे स्वीकार भी कर लिया है.

 


ग्रामीण कार्य विभाग (REO) को इस बात की जानकारी 11 साल बाद 23 जून 2026 को धनबाद के एसपी को पत्र लिखने के बाद मिली. हाईकोर्ट में पुलों के क्षतिग्रस्त होने और दोषी पर कार्रवाई नहीं करने के मामले में दायर जनहित याचिका में REO की ओर से दायर किये गये शपथ पत्र में इस तथ्य का उल्लेख किया गया है.

 


हाईकोर्ट में पंकज यादव द्वारा दायर जनहित याचिका में धनबाद,खूंटी,पलामू और गुमला जिले में REO द्वारा बनवाये गये नौ पुलों को क्षतिग्रस्त होने और विभाग के बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का मामला उठाया गया है. इस मामले में न्यायालय ने विभाग को शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया था. इसके आलोक में REO की ओर से मामले में शपथ पत्र दायर कर की गयी कार्रवाई की जानकारी दी गयी.

 


विभाग की ओर से दायर शपथ पत्र में इन सभी पुलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले में विभागीय कार्यवाही के दौरान जूनियर इंजीनियर से अधीक्षण अभियंता स्तर तक के कुल 26 इंजीनियरों के दोषी पाये जाने और उन्हें विभिन्न प्रकार का दंड दिये जाने का उल्लेख किया गया. शपथ पत्र के अनुसार, पलामू जिले में कोयल नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त होने के मामले में किसी भी इंजीनियर को दोषी नहीं पाया गया. कोयल नदी पर बने पुल के मामले में तीन इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की गयी थी. खूंटी जिले में एक पुलिस के क्षतिग्रस्त होने के मामले में जनहित याचिका में सुनवाई तेज होने के बाद कार्रवाई शुरू हुई. इससे पहले तक इसमें चुप्पी थी.

 


गुमला जिले में छह पुलों के क्षतिग्रस्त के मामले में विभागीय कार्यवाही के दौरान 20 इंजीनियरों को दोषी पाया गया था. इन्हें वेतन वृद्धि, दो साल से आजीवन प्रोन्नति पर रोक की सजा दी गयी थी. लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद सभी इंजीनियरों को दी गयी सजा वापस कर ली गयी है. धनबाद जिले में 22.10 करोड़ की लागत से बने पुल के क्षतिग्रस्त होने के मामले में विभागीय कार्यवाही के दौरान छह इंजीनियरों को दोषी करार देते हुए वेतन वृद्धि, प्रोन्नति पर रोक की सजा दी गयी. इस मामले में भी एक इंजीनियरों को आजीवन प्रोन्नति पर रोक की सजा दी गयी है.


धनबाद में पुल के क्षतिग्रस्त होने और कार्रवाई का ब्योरा

बराकर नदी पर ठेकेदार गणेश राम डोकानिया को 22.10 करोड़ की लागत पर पुल का काम दिया गया था. 2009 में पुल क्षतिग्रस्त हुआ. कमेटी बनाकर मामले की जांच की गयी. डोकानिया को 10 साल के लिए ब्लैक लिस्ट किया गया. बैंक गारंटी जब्त कर ली गयी. इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की गयी. 2009 में हुई घटना में थाने में दर्ज प्राथमिकी को जांच के लिए 2010 में ACB को दिया गया. ACB ने जांच कर 2017 में तथ्यों की भूल करार देते हुए कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी. विभाग को इसकी जानकारी जून 2026 में एसपी धनबाद को पत्र लिखकर पूछे जाने पर मिली. इस मामले में इंजीनियरों पर कार्रवाई की गयी.


जिन इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई

  • - जूनियर इंजीनियर सुदामा प्रसाद को छह वेतन वृद्धि और आजीवन प्रोन्नति पर रोक की सजा. 
  • - जूनियर इंजीनियर सुशील कुमार जैन को छह वेतन वृद्धि और आजीवन पर रोक की सजा.
  • - सहायक अभियंता दूध नाथ सिंह को तीन वेतन वृद्धि और पांच साल तक प्रोन्नति पर रोक की सजा.
  • - सहायक अभियंता अनिल कुमार सिंह को डिमोट किया गया. हाईकोर्ट से हारने के बाद अनिल कुमार सुप्रीम कोर्ट गये हैं.
  • - सहायक अभियंता निर्मल कुमार दत्ता को पांच वेतन और आजीवन प्रोन्नति पर रोक की सजा.
  • - कार्यपालक अभियंता भोला राम को तीन वेतन वृद्धि पर रोक, पांच साल तक प्रोन्नति नहीं.

पलामू में पुल क्षतिग्रस्त होने के मामले में कार्रवाई

पलामू के चैनपुर प्रखंड में कोयल नदी पर 5.48 करोड़ की लागत से पुल बनाने का काम कालसी बिल्डकॉन (हीनू रांची) को दिया गया था. पुल में डैमेज के तत्काल बाद विभाग ने जांच समिति बनायी. समिति ने 29-9-2011 को अपनी रिपोर्ट सौंपी. मार्च 2012 में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. विभाग ने दिसंबर 2012 में ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट कर दिया. लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर जनवरी 2016 में ब्लैक लिस्ट करने के आदेश को वापस ले लिया गया. तीन इंजीनियरों (सुनील कुमार कार्यपालक, रामजी प्रसाद सहायक अभियंता, ब्रजभूषंण जूनियर इंजीनियर) पर विभागीय कार्यवाही हुई. लेकिन कोई दोषी नहीं पाया गया.

खूंटी जिले में पुल के क्षतिग्रस्त होने के मामले में की गयी कार्रवाई

खूंटी जिले में तजना नदी पर 1.87 करोड़ की लागत पर पुल बनाने का काम ओझा ब्रदर्स (कांके रोड) को दिया गया था. निर्माण के दौरान पुल क्षतिग्रस्त हुआ. ठेकेदार ने अपने पैसे से क्षतिग्रस्त हिस्से को बनाया. निर्माण कार्य की जांच में Pier-1, Pier-2 के Deck Slab को और Pier-2 के तीन Griders को हटाकर नये सिरे से बनाने का फैसला हुआ. ठेकेदार को अपने खर्च पर इसे पूरा करने का आदेश दिया गया. 24 जून 2026 को ठेकेदार को डिबार करने और इंजीनियरों के खिलाफ प्रपत्र-क गठित करने का आदेश दिया गया.

गुमला जिले में पुलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले में कार्रवाई

विभाग ने शंख नदी पर 1.82 करोड़ की लागत से जगधात्री कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाये गये पुल के 2011 में क्षतिग्रस्त होने की बात स्वीकार की. भिखमपुर-जारी पथ के नजदीक 1.18 करोड़ की लागत से पालू कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाया गया पुल 2011 में क्षतिग्रस्त हुआ. बसिया प्रखंड में अशोक प्रसाद जयसवाल द्वारा 5.22 करोड़ की लागत से बनाया पुल 2011 में क्षतिग्रस्त हुआ. इसी ठेकेदार द्वारा 1.11 करोड़ की लागत से बिशुनपुर-चौनपुर रोड के कोयल नदी पर बना पुल 2011 क्षतिग्रस्त हुआ.

 

इसके अलावा अशोक जयसवाल द्वारा 2.46 करोड़ की लागत से कामडारा रोड के पास साउथ कोयल नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हुआ. कुमार एंड राय कंस्ट्रक्शन द्वारा 1.57 करोड़ की लागत से  बिशुनपुर-सेंदरी- नेतरहाट रोड के नजदीक कोयल नदी पर बना पुल 2011 क्षतिग्रस्त हुआ. पुलों के क्षतिग्रस्त होने की जांच की गयी. इसमें पुलों के क्षतिग्रस्त होने की वजह मॉनसून में पानी का तेज बहाव बताया गया. इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई. कोर्ट के आदेश के बाद दंड वापस ले लिया गया. 2011 में दर्ज प्राथमिकी करने का आदेश दिया गया था. विभाग ने जून 2026 में एसपी से प्राथमिकी में हुई जांच की जानकारी मांगी है.

कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई वापस

  • - कोर्ट के आदेश पर कार्यपालक अभियंता जवाहर साह के तीन वेतन वृद्धि और आजीवन प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस कर ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश पर कार्यपालक अभियंता सुरेंद्र चौरसिया के पेंशन से 15 प्रतिशत कटौती का आदेश वापस ले लिया गया है.
  • - कोर्ट के आदेश से कार्यपालक अभियंता भरत सिंह की निंदन की सजा वापस ले ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश से कार्यपालक अभियंता गुरमीत सिंह के तीन वेतन वृद्धि और पांच साल तक प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस ले ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश के अशोक कुमार मंडल के तीन वेतन वृद्धि और पांच साल प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस ले ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश से सहायक अभियंता सरफराज के तीन वेतन वृद्धि और पांच साल प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस ले ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश पर सहायक अभियंता राजेश कुमार श्रीवास्तव के तीन वेतन वृदिध और पांच साल प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस कर ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश से सहायक अभियंता राम पुकार राम के तीन वेतन वृद्धि और पांच साल प्रोन्नति की सजा वापस ले ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश पर सहायक अभियंता अनुरोग नारायण प्रसाद के निंदन की सजा वापस कर ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश पर जूनियर इंजीनियर रामानुज सिंह के पेंशन से 15 प्रतिशत कटौती की सजा वापस कर ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश पर जूनियर इंजीनियर दिनेश सिंह के छह वेतन वृद्धि और आजीवन प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस कर ली गयी है.
  • - कोर्ट के आदेश पर जूनियर इंजीनियर अरविंद सिंह के दो वेदन वृद्धि और दो साल प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस.
  • - कोर्ट के आदेश पर जूनियर इंजीनियर शुभम कुमार के दो वेतन वृद्धि और दो साल प्रोन्नति पर रोक की सजा वापस.

 


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