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चतरा से उठाकर वाराणसी में किया बृजेश का फर्जी एनकाउंटर! सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने उठाए

Chatra : वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. बृजेश का शव उसके पैतृक गांव चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र अंतर्गत लुट्टू सोहावन पहुंचने के बाद उसके छोटे भाई एवं सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने यूपी पुलिस और एटीएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पूर्व विधायक ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए दावा किया कि बृजेश को चतरा से पकड़कर उत्तर प्रदेश ले जाया गया और वहां उसकी सोंची समझी साजिश के तहत हत्या कर दी गई. उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की मांग की है.
 
पत्रकारों से बात करते पूर्व विधायक गणेश गंझू
  • - झारखंड पुलिस पर गद्दारी का लगाया आरोप, कहा पहले माओवादियों के खिलाफ इस्तेमाल किया, फिर मरवा दिया ?
  • - पूछा बाइक चला रहा शख्स दोनों हाथों से कैसे कर सकता है अंधाधुंध फायरिंग, सरकार से मामले कि CBI जांच कराने की मांग!

Chatra : वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. बृजेश का शव उसके पैतृक गांव चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र अंतर्गत लुट्टू सोहावन पहुंचने के बाद उसके छोटे भाई एवं सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने यूपी पुलिस और एटीएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पूर्व विधायक ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए दावा किया कि बृजेश को चतरा से पकड़कर उत्तर प्रदेश ले जाया गया और वहां उसकी सोंची समझी साजिश के तहत हत्या कर दी गई. उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

 

बाइक चला रहा था तो दोनों हाथों से फायरिंग कैसे?

गणेश गंझू ने यूपी पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि पुलिस टीम द्वारा रोकने का प्रयास किए जाने पर मोटरसाइकिल सवार बृजेश ने पुलिस पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया. पूर्व विधायक नें सवाल उठाया है कि बाइक चलाने वाला व्यक्ति दोनों हाथों में पिस्तौल लेकर एक साथ दोनों हांथो से फायरिंग कैसे कर सकता है. उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना पहले से रची गई साजिश का हिस्सा है. दूसरी ओर, पुलिस के अनुसार रामनगर इलाके में मुठभेड़ के दौरान बृजेश की ओर से फायरिंग की गई थी और जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी.

 

पहले इस्तेमाल किया, फिर मरवा दिया

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए गणेश गंझू ने झारखंड पुलिस पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस ने पहले बृजेश का इस्तेमाल माओवादियों के खिलाफ किया और बाद में उसे मरवा दिया. पूर्व विधायक ने झारखंड पुलिस को गद्दार तक कह दिया. हालांकि इस दौरान गणेश गंझू ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि टीएसपीसी को झारखंड में पुलिस ने खड़ा किया था. लेकिन वे जानते थे कि उनका भाई टीएसपीसी संगठन को संचालित करता है और लगातार क्षेत्र में रहकर गरीबों का सेवा कर रहा था. उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. साथ ही कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी भी दी है.

 

नक्सली संगठन का सुप्रीमो था, लेकिन समाजसेवा भी करता था

गणेश गंझू ने अपने भाई बृजेश के सामाजिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि बृजेश वर्ष 2010 से पंचायत प्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित होकर गरीबों की सेवा करता रहा. उन्होंने दावा किया कि बृजेश ने क्षेत्र की सैंकड़ो गरीब बेटियों की शादियां कराईं और अशिक्षित बच्चों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से लावालौंग जैसे सुदूरवर्ती प्रखंड में गोपाल सिंह भोक्ता इंटर कॉलेज की स्थापना की. जिसे एनआईए ने सील कर दिया है. गणेश गंझू ने कहा कि वर्ष 2011 में पिता के निधन के बाद श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान उनकी बृजेश से अंतिम मुलाकात हुई थी. उन्होंने कहा कि यदि दोनों भाइयों की मुलाकात होती रहती तो शायद आज हालात अलग होते.

 

पेड़ बढ़ने से पूर्व सरकार करें डाली छांटने का काम

पूर्व विधायक ने सरकार की नक्सल नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कार्रवाई करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि लोग हथियार उठाने को क्यों मजबूर होते हैं. उन्होंने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की, जिससे नक्सलवाद की जड़ को खत्म किया जा सके. उन्होंने तेलंगाना समिति अन्य राज्यों में नक्सली उन्मूलन को लेकर राज्य सरकारों द्वारा संचालित पॉलिसी का जिक्र करते हुए राज्य सरकार से उसका अनुपालन करने की मांग की है. गौरतलब हैं कि बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और एनआईए की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था. ऐसे में अब पूर्व विधायक के आरोपों के बाद यूपी एटीएस के इनकाउंटर व पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग ने कार्रवाई को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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