BSNL- 1.40 लाख करोड़ का पैकेजः उम्मीद बेमानी
Surjeet Singh केंद्र सरकार ने सोमवार को भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के लिये 1.40 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया. मीडिया में ऐसी खबरें आयीं कि सरकार सच में बीएसएनल को एक सफल कंपनी के रुप में देखना चाहती है. सच में इस सरकारी कंपनी का कायाकल्प करके लोगों को निजी कंपनियों की दादागिरी से राहत दिलाने की सोच रही रही है. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो बहुत गलत साबित होने वाले हैं. इस पैकेज की असलियत को समझने के लिये इसमें छिपे पांच (05) तथ्यों को समझना जरूरी होगा. समझना होगा कि पैकेज की राशि किस रुप में मिलेगी और कहां-कहां खर्च होगा. 01- 44,993 करोड़ रुपयेः इस रकम के बदले सरकार बीएसएनएल को 4G स्पेक्ट्रम देगी. यह स्पेक्ट्रम 900-1800 मेगा हर्ट्ज पर काम करेगा. कितनी अजीब बात है, जब देश की प्राइवेट कंपनियां 5G स्पेक्ट्रम खरीद रही हैं, अगले कुछ महीनों में शुरु करने वाली हैं, उस वक्त सरकार बीएसएनएल को 4G स्पेक्ट्रम देने जा रही है. 02- 40,399 करोड़ रुपयेः केंद्र सरकार इतने रूपये का बॉन्ड जारी करेगी. सरकार इस बॉन्ड को गारंटी देगी. मतलब बीएसएनएल को यह रकम नकद के रुप में नहीं मिलेगा. 03- 33000 करोड़ रुपयेः यह वो रकम है, जो कि बीएसएनएल पर सरकार का बकाया है. सरकारी कंपनी होते हुए भी बीएसएनएल को टैक्स देना होता है. बीएसएनएल पर सरकार का 33000 रुपये का टैक्स बकाया है. इस बकाये के बदले सरकार बीएसएनएल का इतने ही रूपये का शेयर ले लेगी. इससे बीएसएनएल को बकाये से मुक्ति मिलेगी और बीएसएनएल में सरकार का शेयर बढ़ जायेगा. 04- 13,000 करोड़ रुपयेः सरकार बीएसएनएल को यह राशि इसलिए देगी, ताकि ग्रामीण इलाकों में फोन, मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट पहुंचाया जा सके. 05- 22,471 करोड़ रूपयेः असल में खुद को उबारने और बाजार में मौजूद कंपनियों से मुकाबला करने के लिये बीएसएनएल को इतनी ही राशि मिलेगी. बीएसएनएल का दुर्भाग्य यह है कि वह इस राशि को भी खुद को मजबूत बनाने में खर्च नहीं कर पायेगा. इसमें से अधिकांश रुपये वीआरएस बकाया समेत अन्य देनदारियों को चुकाने में खर्च हो जायेंगे. इन तथ्यों से क्या समझ बनती है. यह समझना मुश्किल नहीं है कि बीएसएनएल बीमार है और आगे भी बीमार ही रहेगी. क्योंकि हमारी सरकारें ऐसा ही चाहती हैं. एक तो सरकारी कंपनी होते हुए भी बीएसएनएल को सात साल तक 4G स्पेक्ट्रम नहीं दिया गया. यह सरकारी कंपनी 3G सेवा ही दे पा रही है. इसका असर यह हुआ कि बीएसएनएल के उपभोक्ता कम होते चले गये. इसका फायदा बाजार में मौजूद उन निजी कंपनियों को मिला, जो 4G सर्विस के साथ खड़े रहे. और अब जबकि निजी कंपनियां 5G स्पेक्ट्रम के साथ बाजार में आ रही हैं, तब सरकार बीएसएनएल को 4G स्पेक्ट्रम दे रही है. मतलब जो स्थिति आज है, वही स्थिति आने वाले दिनों में ही रहेगी. कुल मिलाकार 1.40 लाख करोड़ के इस पैकेज को आप “नाम बड़े और दर्शन छोटे” कह सकते हैं. [wpse_comments_template]

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