बजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दूरदर्शी सोच का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह बजट 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और कर सुधारों पर केंद्रित है.
वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ, मुद्रा अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का एक साहसिक प्रयास है. इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, जीडीपी विकास दर 6.8-7.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो घरेलू खपत और निजी निवेश पर आधारित है. यह बजट न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय स्थिरता को भी मजबूत करेगा.
बजट का सबसे सराहनीय पहलू है, राजकोषीय अनुशासन. राजकोषीय घाटा जीडीपी का मात्र 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो पिछले वर्ष के 4.4 प्रतिशत से कम है. इससे कर्ज-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत तक घटेगा, जो लंबे समय में अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा. पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 9 प्रतिशत बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करना एक क्रांतिकारी कदम है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की स्थापना और प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के लिए 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन (पांच वर्षों में) से शहरों का आर्थिक विकास तेज होगा. कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम से इनलैंड वाटरवेज और कोस्टल शिपिंग का हिस्सा 6 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक बढ़ेगा, जो पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देगा. सीपीएसई के रियल एस्टेट एसेट्स के लिए डेडिकेटेड आरईआईटी की घोषणा से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, जो अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार करेगा.
कर सुधारों में आम आदमी को बड़ी राहत दी गई है. नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर नहीं लगेगा, जो मध्यम वर्ग की जेब को हल्का करेगा. आईटीआर फाइलिंग की स्टैगर्ड समयसीमा (31 जुलाई तक) से करदाताओं को सुविधा मिलेगी. व्यक्तिगत आयात पर टैरिफ 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना आयातित उत्पादों को सुलभ बनाएगा.
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पीआरओआई की निवेश सीमा 10 प्रतिशत से 24 प्रतिशत तक बढ़ाना एक स्मार्ट कदम है, जो एफडीआई को आकर्षित करेगा. क्लाउड सेवाओं पर टैक्स छूट (2047 तक) से डिजिटल इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा, जो भारत को वैश्विक डेटा हब बनाने में मदद करेगा. हालांकि एसटीटी में मामूली बढ़ोतरी की गई है, लेकिन यह राजस्व बढ़ाने और जिम्मेदार ट्रेडिंग को प्रोत्साहित करने के लिए जरूरी है. कुल मिलाकर ये सुधार कर प्रणाली को सरल और निवेश-अनुकूल बनाते हैं.
विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस इस बजट की जान है. इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आवंटन 22,999 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करना 'मेक इन इंडिया' को नई गति देगा. आईएसएम 2.0, रेयर अर्थ कॉरिडोर और केमिकल पार्क जैसी पहलें आत्मनिर्भरता को मजबूत करेंगी.
बायोफार्मा विकास के लिए 100 अरब रुपये का प्रावधान स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार लाएगा. रक्षा क्षेत्र में विमान पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी माफ करने से रक्षा उत्पादन बढ़ेगा. रोजगार सृजन पर विशेष जोर, जैसे एआई और शिक्षा के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, युवाओं को कौशल प्रदान करेगा. रेलवे में कवच 4.0 सेफ्टी सिस्टम की घोषणा सुरक्षा को प्राथमिकता देती है. निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उपाय वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाएंगे.
यह बजट समावेशी है, जहां ग्रामीण विकास, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए छिपे लाभ हैं. स्वास्थ्य पर फोकस, जैसे कैंसर दवाओं पर ड्यूटी छूट, जीवन रक्षा करेगी. विशेषज्ञों की राय में कैपेक्स बढ़ोतरी से लाखों नौकरियां पैदा होंगी और निजी निवेश को प्रेरित करेगी.
सीआईआई जैसी संस्थाओं ने इसे संतुलित और विकासोन्मुख बताया है.
वैश्विक अनिश्चितताओं में यह बजट भारत की लचीलापन दर्शाता है. कुल मिलाकर, यह एक सकारात्मक, दूरदर्शी दस्तावेज है जो भारत को वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है. सरकार की यह पहल सराहनीय है और आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे.
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