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बजट 2026-27: विपक्ष ने कहा - निराशाजनक और गरीब विरोधी, कांग्रेस-AAP-SP-TMC ने की कड़ी आलोचना

Lagatar Desk : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (एसपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और अन्य विपक्षी दलों ने बजट को 'निराशाजनक' व 'गरीब विरोधी' और 'सुधारों से दूर' करार दिया है.

 

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बजट में बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर कोई ठोस उपाय नहीं हैं, जबकि यह केवल 5 प्रतिशत अमीर वर्ग के हितों को साधता है.

 

कांग्रेस - कमजोर और अस्पष्ट


कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बजट को पूरी तरह से निराशाजनक बताया. उन्होंने कहा कि बजट 2026-27 पूरी तरह से लैकलस्टर है और प्रमुख योजनाओं के आवंटन में पारदर्शिता की कमी है. उन्होंने आगे कहा कि 90 मिनट की लंबी स्पीच के बावजूद बजट हाईप से काफी कम साबित हुआ. 


कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल की चिंता जताते हुए कहा कि आर्थिक विकास अच्छा है, लेकिन क्या यह रोजगार के साथ होगा? जॉबलेस ग्रोथ किसी को फायदा नहीं पहुंचाती. केरल चुनाव के मद्देनजर केंद्र से विशेष लाभ की उम्मीद थी.


प्रियंका गांधी वाड्रा ने बजट से पहले ही कहा कि इनसे ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं, लेकिन देखते हैं. 


कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक दशक से ये मुद्दे अनसुलझे हैं.
गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि क्या हमें विकसित देशों जैसा बजट मिल रहा है? उम्मीद है कि समान बजट मिले.

 

समाजवादी पार्टी - डीफॉर्म बजट, सुधार नहीं


समाजवादी पार्टी (एसपी) प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट को 'डीफॉर्म बजट' कहा, न कि सुधारों वाला. उन्होंने कहा कि इस सरकार से कोई उम्मीद नहीं, उससे बजट में क्या अपेक्षा करें? पिछले बजट केवल 5 प्रतिशत लोगों के लिए थे. सरकार को अपनी वादों की समीक्षा करनी चाहिए. यह बजट गरीबों की समझ से परे है. शिक्षा के बिना विकसित भारत कैसे बनेगा?


 
तृणमूल कांग्रेस - कुछ भी नया नहीं


टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बजट को 'कुछ भी नहीं' बताते हुए कहा कि वित्त मंत्री को नई पहल लाने का मौका नहीं मिला, केवल पुरानी योजनाओं को दोहराया गया.

 

अन्य विपक्षी आवाजें


विपक्ष ने समग्र रूप से बजट को 'सामान्य लोगों के लिए कुछ नहीं' बताया. एमएनआरईजीए जैसी योजनाओं पर चिंता जताई गई, जहां औसतन केवल 35 दिन का रोजगार मिलता है. राज्य सरकारें 16वीं वित्त आयोग की सिफारिशों पर नजर रख रही हैं, लेकिन बजट में पारदर्शिता की कमी की शिकायत है.

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